
सतना। चालू वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में रेल यात्रियों से सतना स्टेशन को ठीकठाक आय हुई तो पार्सल सेवा में उम्मीद से बहुत कम बिजनेस हुआ। विंध्य के व्यापारिक शहर सतना में रेलवे का पॉर्सल विभाग पहले तीन माह में 10 लाख तक की आय अर्जित नहीं कर पाया। यदि बीते दो सालों की पहली तिमाही से इस सीजन की तुलना करें तो यह अब तक की सबसे निराशाजनक स्थिति है। जानकारों के मुताबिक, पॉर्सल विभाग में बीते चार माह से अनलोडिंग की अपेक्षा लोडिंग बहुत ही कम हुई है।
इसके पीछे अनबुक्ड लगेज बड़ी वजह बताई जा रही है। बताया गया कि 100 किमी. दूरी तक के अनबुक्ड लगेज को छोड़ दिया जाए तो भी भारी मात्रा में बिना टिकट रसीद का माल यहां से बाहर ट्रेन में लोड कर भेजा जा रहा है। यदि बिना बुकिंग माल की लोडिंग पर रोक नहीं लगाई जाती तो यही हाल आगे भी जारी रहेगा। सतना स्टेशन के पॉर्सल बुकिंग की सालाना आय 50 से 60 लाख के बीच रहती है।
50 लाख के पड़ जाएंगे लाले
जानकारों की मानें तो सतना स्टेशन के पॉर्सल बुकिंग कार्यालय में यदि पहली तिमाही के जैसे ही व्यापारियों ने दिलचस्पी नहीं दिखाई तो इस साल 50 लाख जुटाने में लाले पड़ जाएंगे। साल 2016-17 में 53 लाख व 2017-18 में पॉर्सल बुकिंग से 57 लाख की आय सतना रेलवे के खाते में दर्ज की गई थी। रेलवे को उम्मीद थी कि इस साल भी अच्छी शुरुआत के साथ कमाई का आंकड़ा 60 लाख के पार पहुंच जाएगा पर अप्रैल, मई व जून को मिलाकर सिर्फ 3222 क्विंटल पॉर्सल की बुकिंग यहां से हो पाई है। इससे महज साढ़े 9 लाख की आय हुई।
स्टेशन से ट्रेन तक बिना बुकिंग लगेज
रेलवे के प्रतिबंधित इलाके में वाहन लाकर अनबुक्ड लगेज ट्रेन में लोड किया जाता है। यह सिलसिला दिनभर चलता है। ऑटो व अन्य वाहन बेधड़क प्लेटफॉर्म एक की बाउण्ड्री तक आते हैं और उसमें भारी मात्रा में लोड माल को व्यापारी उतारकर ट्रेन की बोगियों में रख देते हैं। जिधर से वाहन प्लेटफॉर्म के नजदीक आते हैं वह प्रतिबंधित एरिया है। यहां रेलवे के कई दफ्तर भी हैं।
बाहरी वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित
बताया गया कि ऑटो व अन्य वाहनों से मुख्य पार्किंग स्थल के बगल से लगी सड़क से अनबुक्ड लगेज प्लेटफॉर्म तक पहुंचाया जाता है। पूर्व में एेसी शिकायतें आने के बाद सड़क पर बेरिकेटिंग कर बाहरी वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित एरिया में बंद कर दी गई थी। लेकिन कुछ समय बाद बेरीकेटिंग हटा दी गई। इसके चलते इस रास्ते से जमकर बिना बुकिंग का माल सीधा ट्रेनों तक पहुंचाया जा रहा है। अंदर कोच में लगेज रखने से यात्री परेशान हो रहे हैं।
आंकड़ों पर एक नजर
- 17835 क्विंटल लगेज पॉर्सल के रूप में भेजा गया 2016-17 में
- 53.34 लाख रुपए 2016-17 में पॉर्सल बुकिंग से आय
- 28871 क्विंटल पॉर्सल बुकिंग हुई 2017-18 में
- 57 लाख रुपए राजस्व मिला पॉर्सल से
- 3222 क्विंटल 2018-19 की पहली तिमाही में बुक हुआ पॉर्सल
- 9.57 लाख रुपए अप्रैल, मई व जून में पॉर्सल बुकिंग से आय