यूपी-बिहार तक पटिया सप्लाई
मैहर. परसमनिया पठार में पत्थर का अवैध कारोबार बेखौफ जारी है। कारोबारियों की रसूख के चलते प्रशासन कार्रवाई की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा। स्थानीय सूत्रों की मानें तो क्षेत्र में सैकड़ों की संख्या में पत्थर की अवैध खदानें संचालित हैं। जहां से पटिया निकालकर यूपी-बिहार तक सप्लाई की जाती है।
वन अधिकारी अनजान
हैरानी की बात ये है कि सभी रास्तों में वन विभाग के नाके हैं, फिर भी पत्थर की सप्लाई से अधिकारी अनजान रहते हैं। इसे लेकर विभाग के मैदानी अमले की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। वहीं कुछ लोग तो विभाग के आला अफसरों पर भी मिलीभगत का आरोप लगा रहे हंै। बताया गया कि उचेहरा के वन अधिकारी जेब गर्म रखने आंखें बंद कर लेते हैं।
इधर, फोरलेन प्रभावितों को बांटे दिए फर्जी पट्टे
राष्ट्रीय राजमार्ग सात के चौड़ीकरण में सड़क के किनारे बसे ग्रामीण जो भूमिहीन थे उनके मकान बनाने के लिए शासन ने आवासीय भूखंड आवंटित करने के आदेश दिए थे। जिसके चलते प्रशासन ने भूमिहीनों को भूखण्ड आवंटित करने के आदेश ग्राम पंचायत अगडाल को दिए थे। लेकिन अगडाल सरपंच द्वारा दिए गए 40 भूमिहीनों के पट्टे फर्जी बताए गए हैं। सरपंच ने उमरी की भूमि 222 रकवे में 30 बाई 30 के प्लाट रामबहोर गौतम, बिहारी विश्वकर्मा, सीताराम विश्वकर्मा, इमाम अली, सलीम खान, राज बहोर साकेत, जय लाल साकेत, महबूबा सहित 25 भूमिहीनों को पट्टे आवंटित किए थे। लेकिन पटवारी ने कहा, ये लोग बस्ती में रह रहे हैं।