वोटरों पर नजर, इन योजनाओं को गिनाया
रीवा। प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को संगीत सम्राट तानसेन के जरिए रीवा से रिश्ता जोड़ा। करीब 40 मिनट के भाषण में 12 बार तानसेन का नाम लिया। गरीबी के सहारे कांग्रेस सरकारों पर हमला बोला। कहा, मैं जीवन स्तर सुधारने के लिए आया हूं। देश के लोग 10 घंटे काम करेंगे तो मैं 11 घंटे करुंगा। वे 14 घंटे काम करेंगे तो मैं 15 घंटे काम कर देश को आगे ले जाने का प्रयास करुंगा। तानसेन के सुर और बीरबल की हाजिर जवाबी यहां के जनजन में रची बसी है।
तानसेन के पास ऐसी कला थी कि वह दीपक राग गाते थे, जिससे आग की ज्वाला उत्पन्न हो जाती थी। एक बार उन्होंने ऐसा गीत गाया कि उनका तन भी झुलसने लगा। अकबर को पता चला कि बडऩगर में ताना और रिरी नाम की दो बेटियां मल्हार राग गाती हैं तो वहां तानसेन को भेजा। उस संगीत के बाद वर्षा हुई और उनके तन की ज्वाला शांत हुई। कहा, गुजरात के उसी बडऩगर का मैं रहने वाला हूं, इसलिए रीवा से नाता जुड़ा है। आपके संकल्पों को पूरा करने के लिए मैं लगा हूं।
स्वास्थ्य
कांग्रेस के जमाने में मरीज अस्पताल तक पहुंचने में सफल नहीं हो पाता था। उपचार के अभाव में मौत हो जाती थी, हमने इसे सरल किया और लोगों को लाभ भी मिल रहा है।
सड़क
पहले की सड़कें ऐसी थी कि गर्भवती महिला को गांवों से लोग ट्रेक्टर से लेकर चलते थे तो रास्ते में ही प्रसव हो जाता था या फिर उसकी मौत हो जाती थी। आज सड़कों का जाल बिछा है, सहजता से एक स्थान से दूसरे स्थान तक लोग पहुंच सकते हैं।
मंच से इनका लिया नाम
मंच पर सांसद राकेश सिंह, सांसद गणेश सिंह, सांसद जनार्दन मिश्र, विष्णुदत्त शर्मा, सीधी जिलाध्यक्ष राजेश मिश्रा के नाम लिए।
उज्जवला
प्रधानमंत्री उज्जवला योजना का जिक्र करते हुए कहा कि धुएं में अब कोई भी महिला खाना नहीं पकाएगी। आगे इस योजना को और भी व्यापक बनाया जाएगा।
सौर ऊर्जा
पीएम ने कहा कि कांग्रेसी सूरज की ताकत नहीं पहचानते थे, हमने पहचाना और सौर ऊर्जा से चार हजार मेगावॉट उत्पादन शुरू कर दिया। किसानों को सोलर पंप देंगे, वह स्वयं बिजली बनाएगा। किसान अब अन्नदाता के साथ ही ऊर्जा दाता भी बनेगा।
सोनिया गांधी
नाम लिए बिना कहा, प्रदेश में जनता ने कहने को 15 साल दिए, लेकिन दिल्ली में मैडम की रिमोट कंट्रोल वाल सरकार थी। भाजपा सरकार का नाम सुनते ही मैडम नाराज हो जाती थी और रोड़े अटकाने का काम करती थी। दस साल तो दिल्ली की सरकार से लडऩे में चले गए।
इंदिरा गांधी
एक समय कांग्रेसी नारा देते थे कि आधी रोटी खाएंगे इंदिरा की सरकार बनाएंगे। मतलब वह गरीबी बनाए रखना चाहते थे।
राजीव-राहुल
राजीव गांधी कहते थे कि सरकार का एक रुपया शासन तक पहुंचते-पहुंचते 15 पैसे हो जाता था। उस समय तो पंचायत से लेकर केन्द्र तक उन्हीं की सत्ता थी फिर ऐसा क्यों होता था। आखिर वह कौन सा पंजा होता था जो जनता के 85 पैसे खा जाता था। नेताजी कंफ्यूज हैं और पार्टी फ्यूज है वह लोगों तक करंट नहीं पहुंचा सकती।