सतना

विधानसभा सीट रीवा: कांटे के मुकाबले में मुद्दे बनेंगे रोड़ा, एंटी इनकम्बेंसी का भी रहेगा असर

अपने 15 वर्ष के काम के सहारे पक्ष रखेगी भाजपा
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Oct 14, 2018
MP Election 2018: Rewa Assembly BJP Congress Ground report
MP Election 2018: Rewa Assembly BJP Congress Ground report

रीवा। रीवा विधानसभा में इस बार चुनाव कांटे के मुकाबले की ओर बढ़ रहा है। सत्ताधारी दल भाजपा के पास विकास के कार्य बताने के लिए लंबी फेहरिस्त है, मूलभूत समस्याओं के निदान के साथ ही शहर को महानगरों की तर्ज पर आगे ले जाने के दावे किए जा रहे हैं। ऐसे में विपक्ष आक्रामक हो रहा है। आरोप लगाए जा रहे कि कुछ चिह्नित लोगों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से कार्य कराए गए। सरकारी भूमियों को कम दामों पर दे दिया गया।

बीते तीन चुनाव में विपक्ष की घेराबंदी कमजोर होने की वजह से भाजपा के राजेन्द्र शुक्ला भारी मतों के अंतर से एकतरफा जीत दर्ज कराते रहे हैं। इस बार कई ऐसे मुद्दे हैं जो राह में कठिनाई पैदा कर रहे हैं। जनता के बीच विकास के नाम पर मनमानी किए जाने पर जवाब मांगे जा रहे हैं।

जिसका अब तक संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। भाजपा के सामने कांग्रेस, बसपा सहित अन्य दमदार उपस्थिति दर्ज कराने की तैयारी में हैं। सरकार के खिलाफ एंटी इनकमबेंसी भी असर छोड़ सकती है। रीवा में ज्यादातर शहरी क्षेत्र आता है, यहां का मतदाता विकास तो चाहता है लेकिन उसके दुरुपयोग की समीक्षा भी करता है।

ये रहेंगे चुनावी मुद्दे
शहर और उससे लगे गांवों में समस्याएं हैं, जो इस बार चुनावी मुद्दा बनेंगी। इसमें सबसे प्रमुख एक ही बिल्डर्स को शहर के प्रोजेक्ट देना, सरकारी भूमि कम कीमत पर देना, जिला न्यायालय का भवन निर्माण, सीवरेज प्रोजेक्ट में आधे शहर की सड़कें खोदकर छोड़ देना, शुद्ध पेयजल, अवैध कॉलोनियां, ऐतिहासिक महत्व की अनदेखी, सड़क, बिजली, स्वास्थ्य महकमे की कमी, शहर में खेल मैदान की कमी भी मुद्दा होगा।

अब तक ये रहे रीवा के विधायक
जगदीशचंद्र जोशी 1957, शत्रुघ्न सिंह 1962, 1967, मुनि प्रसाद शुक्ला 1972, प्रेमलाल मिश्रा 1977, मुनि प्रसाद 1980, प्रेमलाल मिश्रा 1985, पुष्पराज सिंह 1990, 1993, 1998, राजेन्द्र शुक्ला 2003 से अब तक।

इनकी होगी महत्वपूर्ण भूमिका
रीवा विधानसभा क्षेत्र में व्यापारियों एवं मुस्लिमों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। शहरी क्षेत्र होने से भारी संख्या में व्यापारी मतदाता हैं। बाहरी मतदाताओं की भी भूमिका शहर में रहती है। मसलन यूपी, बिहार सहित अन्य जगहों से आने वाले लोग भी यहां मतदाता बन गए हैं। इनमें 12 हजार मतदाता हैं, जो मतदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं।

Updated on:
14 Oct 2018 02:14 pm
Published on:
14 Oct 2018 02:14 pm