
सतना। शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और निर्भीक मतदान को लेकर जिला निर्वाचन अधिकारी राहुल जैन ने गुरुवार को सेक्टर की बैठक ली। इस दौरान पुलिस अधीक्षक संतोष सिंह गौर भी मौजूद रहे। बैठक में सेक्टर अधिकारी सहित संबंधित थाना प्रभारियों के कामकाज की समीक्षा की गई। उन्हें नए सिरे से अपने सेक्टर के गांवों और घरों में जाकर वल्नरेबल लोगों की पहचान करने के निर्देश दिए।
कहा कि ऐसे लोगों पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की जाए। अब तक निष्क्रिय नजर आ रही एफएसटी टीम के लिए आरओ को कहा गया कि प्रतिदिन एफएसटी को टास्क दिया जाए। बैठक में लापरवाही करने पर दो सेक्टर अधिकारियों को शो-कॉज जारी किया। वहीं सौंपे गए कार्यों को गंभीरता से नहीं लेने और जानकारी का अभाव होने पर दो थानेदारों पर पुलिस अधीक्षक ने जुर्माना लगाया।
यह भी नहीं बता सके
जिला निर्वाचन अधिकारी ने सभी सेक्टर अधिकारियों को खड़ा कर अपने-अपने क्षेत्र की वल्नरेबल बस्तियों और व्यक्तियों की जानकारी चाही तो कोई नहीं बता सके। यह शुरुआत चित्रकूट विधानसभा से हुई थी। लिहाजा, कलेक्टर ने यहां के आरओ पर भी नाराजगी जाहिर की। सतना विधानसभा के सेक्टर क्रमांक ७१ के सेक्टर अधिकारी नर्मदा प्रसाद त्रिपाठी अनुभाग अधिकारी बिजली कंपनी से सवाल किया कि जब इवीएम सहित वीवीपैट लेकर जाएंगे तो उन्हें केन्द्र ले जाने से पहले चेक करेंगे। इस पर त्रिपाठी का जवाब हां रहा। जबकि इस बार इवीएम और वीवीपैट को मतदान केन्द्र में ही चेक करना है। मैहर विधानसभा के सेक्टर क्रमांक 105 के सेक्टर अधिकारी डॉ. सिद्धार्थ शर्मा सहायक प्राध्यापक ग्रामोदय विश्वविद्यालय से एक पोलिंग स्टेशन की जानकारी चाही तो उन्होंने अपने सेक्टर में नहीं होने की जानकारी दी। इसी दौरान वे मोबाइल से बात करते हुए भी पाए गए। इस पर दोनों की दो वेतनवृद्धियां रोकने के शोकॉज जारी किया।
शस्त्र जमा नहीं करने पर दंड
बैठक में शस्त्र लाइसेंस निलंबित करने के बाद थानावार शस्त्र जमा करने की भी समीक्षा की गई। पाया गया कि थाना प्रभारी नयागांव विनायक योगी और थाना प्रभारी बरौंधा रामसिंह ने शस्त्र जमा करने में रुचि नहीं दिखाई। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का गंभीरता से पालन नहीं करने का भी दोषी पाया गया। इस पर पुलिस अधीक्षक संतोष सिंह गौर ने बताया कि इन दोनों थाना प्रभारियों पर जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही सभी थाना प्रभारियों को तत्काल प्रभाव से अपने क्षेत्र के शस्त्र जमा कराने के निर्देश दिए हैं।
अभी तक यह हुई गलती
जिला निर्वाचन अधिकारी ने सेक्टर अधिकारियों और पुलिस के एसओ से बात की तो वल्नरेबलिटी की ठोस जानकारी नहीं थी। इस पर यह तथ्य सामने आया कि अभी तक उन्हें इस संबंध में कहा ही नहीं गया था। बताया गया कि आरओ और एसडीओपी स्तर से वल्नरेबल्टी की सूची तैयार कर सेक्टर अधिकारियों को देने के बाद उनके हस्ताक्षर करवा कर ले लिया गया था। इसके साथ ही सेक्टर अधिकारियों का संबंधित एसओ से सीधा संवाद भी नहीं हो सका था। लिहाजा अधिकारियों को क्षेत्र में घूमकर मैपिंग का काम पूरा करने कहा।