MP News: मध्य प्रदेश में सामने आया थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को HIV संक्रमित ब्लड चढ़ाने का चौंकाने वाला मामला, सरकार सख्त, दिए बड़े संकेत...
MP HIV Blood Transfusion Case Update: थैलेसीमिया पीड़ित छह बच्चों को जिला अस्पताल के ब्लड बैंक से एचआइवी संक्रमित खून चढ़ाने के गंभीर मामले को अफसरों ने फिलहाल दबा दिया है, लेकिन सरकार ने मौजूदा व्यवस्था को बदलने की तैयारी कर ली है। सरकारी ब्लड बैंकों से सैंपल की जांच कराने का जिम्मा प्राइवेट हाथों से वापस लेने के संकेत हैं।
फिलहाल स्वास्थ्य सेवाओं में दो कंपनियों सूर्या और साइंस हाउस का हस्तक्षेप है। खासकर, ब्लड बैंक और उससे जुड़े तमाम इंतजाम इन्हीं के पास हैं। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने स्वीकारा है कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए जल्द ही बड़े बदलाव किए जाएंगे।
दरअसल, खून के कारोबार में कमाई की प्रवृत्ति के कारण तय प्रोटोकॉल का उल्लंघन हो रहा है। डोनर से लेकर पैथोलॉजी लैब तक ध्यान पैसे कमाने पर है। प्रोफेशनल ब्लड डोनर खून बेचकर अपना पेट भरते हैं। ब्लड बैंक के आसपास दलाल खून की सौदेबाजी करते हैं। सतना के ही जिला अस्पताल परिसर में एक सप्ताह में दो बार दलालों की धरपकड़ हुई, जिसमें बड़े गिरोह का खुलासा हुआ।
सूर्या ट्रस्ट के हाथों में ब्लड बैंक आने के बाद सैंपल जांच की पद्धति बदल दी गई। पहले स्वास्थ्य विभाग एलाइजा टेस्ट करता था, लेकिन अब क्लिया टेस्ट किया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार एलाइजा टेस्ट सटीक होता था। सूर्या ने कम विंडो पीरियड का दावा करते हुए क्लिया मैथड से जांच करना शुरू कर दिया।
1. ऑनर्स ऑफ रिस्पोंसिबिलिटी स्टेट की हो। एमपी के सभी ब्लड बैंक सेंट्रलाइज हो। प्राइवेट ब्लड बैंक बंद हो। सरकार और रेडक्रास ही ब्लड बैंक चलाएं।
2. प्रोफेशनल ब्लड डोनेशन को बंद किया जाए। वालंटियर डोनर्स को बढ़ावा दिया जाए। सरकारी अस्पतालों सहित अन्य स्थानों पर ब्लड कलेक्शन सेंटर खोले जाएं।
3. मल्टीपल इन्वेस्टिगेशन सिस्टम अनिवार्य किया जाए। खून लेने से पहले और किसी को खून चढ़ाने के पहले सैंपल जांच को अनिवार्य किया जाए। जरूरी नहीं कि पैकेट में बंद खून शुद्ध ही होगा।