नवंबर में ही सूख गया एनीकट, नहर से छोड़ा जा रहा पानी
सतना. नगर निगम प्रशासन ने जलावद्र्धन योजना के तहत शहर में 40 एमएलडी का जलशोधन यंत्र को स्थापति कर दिया। लेकिन फिल्टर प्लांट में पानी की आपूर्ति के लिए एनीकट की क्षमता नहीं बढ़ाई गई। परिणाम यह है कि सालभर शहर की प्यास बुझाने वाला एनीकट इस वर्ष नवंबर में ही सूख गया। अब शहर में जलापूर्ति के लिए नगर निगम प्रशासन पूरी तरह बाणसागर के पानी पर निर्भर हो गया है। जलकार्य विभाग के अनुसार एक नवंबर को एनीकट का जलस्तर घटकर एक मीटर रह गया था।
निगम ने बाणसागर के अधिकारियों से एनीकट में पानी छोडऩे की मांग
इतने पानी से शहर में महज दस दिन की सप्लाई हो सकती थी। इसे गंभीरता से लेते हुए निगम प्रशासन ने बाणसागर के अधिकारियों को पत्र लिखकर एनीकट में पानी छोडऩे की मांग की। शर्त के अनुसार बाणसागर विभाग ने एनीकट को भरने नहर में पानी छोड़ दिया है। इससे फिलहाल शहर में गहराते जल संकट की समस्या दो माह के लिए टल गई है।
हर दो माह में लेना होगा पानी
पानी के लिए शहर की 3 लाख आबादी पूरी तरह एनीकट पर निभर है। साल दर साल शहर में जलसंख्या वृद्धि के साथ- साथ पानी की मांग भी बढ़ रही है। जबकी निगम प्रशासन द्वारा एनीकट की क्षमता में वृ़द्धि के कोई उपाय नहीं किए गए। एेसे में अब शहर की जलापूर्ति पूरी तहर बाणसागर के पानी पर निर्भर है। शहर में प्रतिदिन जितने पानी की अपूर्ति हो रही है, उस मांग को पारा करने एनीकट की जल क्षमता सिर्फ दो माह हैं। एेसे में शहर में निरंतर जलापूर्ति के लिए निगम प्रशासन को हर दो माह में बाणसागर के पानी से एनीकट को भरना होगा। यदि बाणसागर विभाग ने हर दो माह में एनीकट में पानी नहीं छोड़ा तो गर्मी में जल संकट हा़े सकता है।
क्यों बनी यह स्थित
कृपालपुर स्थित टमस नदी में बने एनीकट की कुल जलभराव क्षमता ४ मीटर है। इससे यदि हर दिन १५ एमएलडी पानी का दोहन किया जाए तो डैम में संरक्षत जल से पांच माह तक शहर को जलापूर्ति की जा सकती है। लेकिन इस वर्ष जिले में अल्पवर्षा के कारण अक्टूबर में ही टमस नदी की धार टूट गई। वहीं शहर में बढ़ती पानी की मांग को पूरा करने एनीकट से हर दिन ३५ एमएलडी पानी पानी का दोहन किया जा रहा है। अत्यधिक दोहन के कारण एनीकट एक माह में ही खाली हो गया।