
Even after the awakening of god will have to wait long for the Muhurta
सतना. देव प्रबोधिनी एकादशी पर 19 नवंबर को देव उठेंगे। मंदिरों में तुलसी सालिग्राम का विवाह कराया जाएगा। आमतौर पर देव उत्थापनी एकादशी से मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाती है। इस बार ग्रह स्थिति के कारण देवउठनी ग्यारस के बाद 58 दिन तक मांगलिक कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त नहीं है। ज्योतिषियों के अनुसार विवाह, गृह आरंभ, ग्रह प्रवेश आदि के लिए दोष रहित शुभ मुहूर्त का होना आवश्यक है।
7 माह में 45 श्रेष्ठ मुहूर्त
ऐसे श्रेष्ठ मुहूर्त नए साल 2019 में 17 जनवरी से शुरू होंगे। जुलाई तक 7 माह में 45 श्रेष्ठ मुहूर्त हैं, जिनमें मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं। पं. मोहन द्विवेदी के अनुसार, मांगलिक कार्य करने में गुरु के तारे का उदय होना विशेष माना जाता है। देव उठने से करीब एक सप्ताह पहले 13 नवंबर को गुरु का तारा अस्त हो रहा है। इस कारण शुरुआती मुहूर्त ही अच्छे नहीं हैं।
त्रिग्रही युति भी समस्या
16 नवंबर से वृश्चिक राशि में सूर्य, बुध, गुरु का त्रिग्रही युति संबंध बनेगा। यह युति 15 दिसंबर तक रहेगी। सूर्य व गुरु का युति में साथ होना मुहूर्त का संक्रमण कहलाता है। इस अवधि में मांगलिक कार्य करना उचित नहीं है। 15 दिसंबर से मलमास की शुरुआत हो जाएगी, जो 14 जनवरी तक रहेगा। इन सब स्थितियों के कारण 17 जनवरी से श्रेष्ठ मुहूर्त शुरू होंगे।
Published on:
11 Nov 2018 10:36 pm
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