
सतना. कक्षा पहली में पढ़ने वाला सात साल का लड़का पीयूष, आदिवासी बाहुल्य मझगवां इलाके के पछीत गांव में मास्टर के नाम से पहचाना जाता है। यह पहचान उसे यूं ही नहीं मिली है बल्कि वह वास्तव में मास्टर है। वह अपनी ही स्कूल की पहली कक्षा के बच्चों को पढ़ाता है। अपने साथी बच्चों को जब वह पढा रहा होता है तो कोई भी उसे देख कर यह नहीं कह सकता है कि वह किसी प्रशिक्षित शिक्षक से कमतर अंदाज में पढ़ाता है। उसका पढ़ाने का अंदाज इतना शानदार है कि उसकी कहानियां जिला शिक्षाधिकारी कार्यालय में भी सुनाई जाने लगी हैं और खुद डीईओ भी उसके मुरीद हो चुके हैं। इतना ही नहीं वे खुद भी उसे कक्षा में पढ़ाते देख चुके हैं।
कभी था दस्यु प्रभावित इलाका
मझगवां का आदिवासी बाहुल्य इलाका गौहानी जो कभी दस्यु प्रभावित क्षेत्र के रूप में पहचाना जाता था आज स्कूल शिक्षा विभाग का संकुल है। इसी संकुल में पछीत गांव की माध्यमिक शाला आती है। 8वीं कक्षा तक का यह विद्यालय एकल शिक्षकीय है अर्थात यहां पर एक शिक्षक शोभराज सिंह पदस्थ हैं। विभाग ने उन्हें इस विद्यालय के प्रधानाचार्य का भी दायित्व सौंप रखा है। विद्यालय में शिक्षकों की कमी देख उन्होंने अन्य शिक्षकों की पदस्थापना का इंतजार न करते हुए विद्यालय की अलग-अलग कक्षाओं के कुछ प्रतिभाशाली बच्चों को चुना और उन्हें अलग से समय देकर पढ़ाने की कला में दक्ष करना शुरू कर दिया। तय समय से इतर इन बच्चों की क्लास लगाई जाती। इन्हें कक्षा के पाठ तो पढ़ाए जाते साथ ही इन्हें बच्चों को पढ़ाने के तरीके भी बताने लगे।
फिर शुरू हुआ प्रायोगिक ज्ञान
इसके बाद शोभराज सिंह ने इन बच्चों को अपनी-अपनी कक्षाओं में पढ़ाने का काम अपनी मौजूदगी में शुरू करवाया। शुरुआती दौर में थोड़ी झिझक रही लेकिन कुछ ही दिनों में यह झिझक जाती रही और बच्चे अपनी कक्षा के धीरे-धीरे मास्टर बन गये। इसमें कक्षा पहली में पढ़ने वाला पीयूष अब खुद पहली कक्षा के बच्चों को पढ़ाता है। इसी तरह इस विद्यालय के अन्य मास्टर बच्चों में कक्षा एक की हर्षिता, कक्षा 2 की प्रतिमा, कक्षा 3 के नीलेश सिंह, कक्षा 5 की नीता सिंह और रेशु सिंह हैं। ये सभी अपनी-अपनी कक्षाओं में बच्चों को पढ़ाते हैं।
घर में देते हैं अतिरिक्त समय
पीयूष सहित अन्य मास्टर बच्चों ने बताया कि स्कूल की छुट्टी होने के बाद जब अन्य बच्चे खेलने कूदने में समय बिताते हैं तो हम अपने क्लास में चल रही पढ़ाई से आगे की पढ़ाई करते हैं, ताकि अगले दिन क्लास के बच्चों को पढ़ा सकें।
''अपने दौरे मझगवां क्षेत्र के विद्यालयों के निरीक्षण में गये थे। पछीत एकल शिक्षकीय शाला है लिहाजा यहां पढ़ाई की स्थिति देखने के लिये गये थे। जब विद्यालय पहुंचे तो शोभराज सिंह तो अपनी कक्षा ले रहे थे लेकिन पाया कि पहली कक्षा में पीयूष अपनी क्लास के बच्चों को बड़े तरीके से पढ़ा रहा था। उसे देख कर लगता है कि वह सिद्धहस्थ शिक्षक है। बाद में पता चला कि यहां 6-7 बच्चे ऐसे है जो अपनी अपनी कक्षाओं के बच्चों को पढ़ाते हैं। यह एक अच्छा प्रयोग है।''
- एसएन पाण्डेय, जिला शिक्षा अधिकारी