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Satna: भूमाफिया तैयार कर रहे कलेक्टर सहित अन्य अधिकारियों के फर्जी आदेश

96 लाख के फर्जीवाड़े में हो रहे नित नये खुलासे, एसपी ने तय किये जांच के बिन्दु अमरपाटन तहसील की ऋण पुस्तिका से मैहर तहसील का बना दिया भू-अधिकार
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सतना

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Ramashankar Sharma

•

Updated: 3 Feb 2022, 10:38 AM IST

Satna: भूमाफिया तैयार कर रहे कलेक्टर सहित अन्य अधिकारियों के फर्जी आदेश

इस तरह तैयार किया कलेक्टर का फर्जी आदेश

सतना. दूसरे की जमीन को अपना बता कर 96 लाख रुपये में बेचने के मामले में नित नये खुलासे हो रहे हैं। इस मामले में यह भी जानकारी सामने आई है कि जिले में भूमाफिया इतना बेखौफ हो चुका है कि वो कलेक्टर तक के फर्जी आदेश तैयार कर रहा है। मैहर में केजेएस सीमेन्ट की जमीन फर्जी तरीके से अपने नाम कर उद्योगपति सिंघानिया को बेचने वाले शिवेन्द्र ने कलेक्टर का भी फर्जी आदेश तैयार किया था। उल्लेखनीय है कि मैहर में इसके पहले भी तहसीलदार, एसडीएम के फर्जी आदेशों के जरिये भूमाफिया ने जमीन फर्जीवाड़ा करने की कोशिश की है।

एसपी ने शुरू करवाई जांच

मैहर के ग्राम लखवार स्थित केजेएस सीमेंट फैक्ट्री की जमीन को फर्जी ऋण पुस्तिका और नकली खसरे के सहारे शिवेन्द्र सिंह द्वारा अपनी जमीन बताते हुए उद्योगपति पद्म सिंघानिया को 96 लाख रुपये में बेचने के मामले की जांच प्रारंभ हो गई है। पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह ने इस मामले में जांच के पांच बिन्दु तय किये हैं। उधर जिस नंबर की फर्जी ऋण पुस्तिका के जरिये मैहर तहसील के ग्राम लखवार में शिवेन्द्र सिंह का भूमि स्वामित्व बताया गया है वह ऋण पुस्तिका अधीक्षक भू-अभिलेख कार्यालय से अमरपाटन तहसील को जारी की गई थी। राजस्व और भू-अभिलेख अधिकारी अब इसकी जांच कर रहे हैं कि अमरपाटन तहसील के लिये जारी सरकारी ऋण पुस्तिका मैहर तहसील कैसे पहुंच गई। उधर इस मामले में एक नया खुलासा यह भी सामने आया है कि आरोपी शिवेन्द्र ने यह जमीन अपने नाम करने कलेक्टर का एक फर्जी आदेश भी तैयार किया था।

ये हैं जांच के 5 बिन्दु

कूट रचित दस्तावेजों के सहारे 96 लाख रुपये का फर्जीवाड़ा किये जाने के पत्रिका के खुलासे के बाद अब सभी संबंधित विभाग सक्रिय हो गए हैं। इस मामले को पुलिस अधीक्षक ने संज्ञान में लेते हुए इस मामले की जांच प्रारंभ कर दी है। शुरुआती चरण में इसके लिये उन्होंने जांच के पांच बिन्दु तय किये हैं। इसमें संबंधित जमीन का हाईकोर्ट में क्या स्टेटस है? केजेएस सीमेंट के नाम पर जमीन का नामांतरण कब किस आदेश से किया गया और क्या यह नामांतरण हाईकोर्ट के आदेश के स्टे के बाद किया गया? जिस सीरियल नंबर की ऋण पुस्तिका के जरिये फर्जीवाड़ा किया गया वह सीरियल नंबर की मूल ऋण पुस्तिका किस राजस्व अधिकारी व पटवारी को प्रदान की गई थी? केजेएस ने इस जमीन पर कब और किसके आदेश पर कब्जा दखल प्राप्त किया? जमीन की रजिस्ट्री में 96 लाख रुपये का ट्रांसफर चेक या आरटीजीएस के माध्यम से हुआ इसकी स्थिति?

सक्रिय हुई थाना पुलिस

इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल कर बैठी थाना पुलिस अब एसपी के आदेश के बाद सक्रिय हो गई है। तय किये जांच बिन्दु के आधार पर जांच भी शुरू कर दी गई है। बुधवार को पुलिस कर्मी एसएलआर कार्यालय पहुंच कर ऋण पुस्तिका के संबंध में जानकारी चाहे हैं। जिस पर एसएलआर कार्यालय से बताया गया है कि जिस सीरियल नंबर की ऋण पुस्तिका के जरिये फर्जीवाड़ा किया गया है वह ऋण पुस्तिका एसएलआर कार्यालय से अमरपाटन तहसील को जारी की गई थी। इधर पत्रिका की पड़ताल में पाया गया है कि अमरपाटन तहसील से यह ऋण पुस्तिका पटवारी मनसुखलाल कोल को दी गई थी। यह ऋण पुस्तिका उसने अपने अतिरिक्त प्रभार के हल्के पठरा के लिये इश्यू करवाई थी। लेकिन बताया जा रहा है कि उसने यह ऋण पुस्तिका किसे दी थी इसका रिकार्ड उसके पास से नहीं मिल पा रहा है।

सामने आया कलेक्टर का फर्जी आदेश

फैक्ट्री की जमीन को अपनी जमीन बताकर बेचने का प्लान शिवेन्द्र सिंह ने बड़े सुनियोजित तरीके से किया था। इसके लिये उसने फर्जी ऋण पुस्तिका और नकली खसरा तो तैयार किया ही साथ ही इसके समर्थन में कलेक्टर अजय कटेसरिया के हस्ताक्षर वाला फर्जी आदेश भी तैयार किया। इस आदेश में कहा गया है कि केजेएस फैक्ट्री अधिग्रहण के बाद इस जमीन का उपयोग नहीं कर रही है और वर्तमान में इस जमीन में शिवेन्द्र सिंह का कब्जा है। लिहाजा इसका अधिग्रहण निरस्त करते हुए यह जमीनें पूर्व भू-स्वामी शिवेन्द्र सिंह के नाम की जाएं। लेकिन जब इस आदेश की सत्यता पता की गई तो पाया गया कि जिस क्रमांक से आदेश जारी होना दिखाया गया है वैसा कोई प्रकरण क्रमांक संबंधित शाखा में मौजूद नहीं है। साथ ही जिस तारीख को आदेश जारी होना बताया गया है उस दिन अवकाश था। इस आदेश को फर्जी तरीके से तैयार करना पाया गया है।

सामने आया सिंघानिया का पक्ष

इस मामले में अब क्रेता पद्म सिंघानिया का पक्ष भी सामने आया है। चूंकि फर्जी तरीके से क्रय की गई जमीन के मामले में सवाल उन पर भी उठ रहे हैं। मामले में सिंघानिया के जीएम की ओर से बताया गया है कि यह जमीन मैहर निवासी दीपक अग्रवाल ने क्रय करवाई है और उन्होंने ही इस जमीन के सभी अभिलेख और खानापूर्ति पूरी करवाई है। ऐसे में इस फर्जीवाड़े में एक नए किरदार के रूप में दीपक अग्रवाल का नाम भी जुड़ गया है।

'' मामले की जांच प्रारंभ कर दी गई है। थाना पुलिस को जांच के प्राथमिक बिन्दु तय कर दिये है। इस जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।'' - धर्मवीर सिंह, पुलिस अधीक्षक