28 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Satna: 5 करोड़ की सरकारी जमीन निजी करने के साजिशकर्ताओं पर पुलिस मेहरबान

तहसीलदार, एसडीएम के फर्जी हस्ताक्षर और आदेश के जरिये रचा था खेल मैहर थाना पुलिस शिकायत के तीन माह बाद भी नहीं दर्ज कर सकी एफआईआर

2 min read
Google source verification
Satna: 5 करोड़ की सरकारी जमीन निजी करने के साजिशकर्ताओं पर पुलिस मेहरबान

Satna: Police merciful to the conspirators to privatize govt land

सतना. मैहर कस्बे में नेशनल हाइवे से लगी व्यावसायिक प्रयोजन की शासकीय नजूल जमीन जिसका बाजार मूल्य लगभग 5 करोड़ रुपये हैं उसे हड़पने के लिये दो लोगों ने तहसीलदार और एसडीएम के फर्जी हस्ताक्षर से न्यायालयीन आदेश पत्र बनाए। इसके आधार पर 2000 वर्ग फीट की जमीन स्वयं के नाम कराने की साजिश रची। लेकिन अधिकारियों की सजगता के कारण इनका फर्जीवाड़ा पकड़ में आ गया और बेशकीमती शासकीय भूमि निजी स्वामित्व में जाने से बच गई। फर्जी न्यायालयीन पत्र और पीठासीन अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर के मामले में संबंधितों के विरुद्ध एफआईआर करने के तहसीलदार ने साक्ष्य सहित थाना प्रभारी मैहर को पत्र लिखा। लेकिन ढाई माह बाद भी पुलिस इतने गंभीर मामले में एफआईआर तक दर्ज नहीं कर सकी है। यह हालात तब हैं जब मुख्यमंत्री जमीन माफिया के खिलाफ सख्त एक्शन की बात अपनी हर कलेक्टर-कमिश्रर कांफ्रेंस में करते हैं।

लच्छू सिंधी और हीरालाल यादव की साजिश

मिली जानकारी के अनुसार मैहर निवासी हीरालाल यादव और लक्ष्मण डोडानी उर्फ लच्छू सिंधी ने मैहर तहसीलदार मानवेन्द्र सिंह, तत्कालीन एसडीएम सुरेश अग्रवाल और राजस्व निरीक्षक लालजी गौतम के फर्जी हस्ताक्षर और फर्जी आदेश के जरिये सरकारी नजूल भूमि हड़पने की साजिश रची थी। एक फर्जी नजूल प्रकरण के जरिये मैहर की भूमि खसरा नंबर 1002 नजूल शीट क्रमांक 22ए भूखंड क्रमांक 89 जिसका क्षेत्रफल 2000 वर्ग फीट है की स्थायी लीज स्वीकृत होने का दावा किया। इस प्रकरण के जरिय नजूल मेंटीनेंस खसरा भी तैयार करने कहा। इसके साथ ही तहसीलदार मैहर और एसडीएम मैहर की फर्जी राजस्व अनुवृत्ति पत्र भी उपलब्ध कराए। इन सभी दस्तावेजों में तहसीलदार, एसडीएम और आरआई के फर्जी हस्ताक्षर बनाए गए थे। इसके आधार पर संबंधित जमीन का मौका मुआयना किया गया तो 9760 वर्ग फीट आराजी वाली यह जमीन कटनी रोड पर नेशनल हाइवे के से लगकर पाई गई। जो व्यावसायिक प्रयोजन का महत्वपूर्ण भू-खंड माना गया और शासकीय रिकार्ड में रिक्त भूखंड इंद्राज पाया गया।

इस तरह रची साजिश

जमीन हासिल करने जिस प्रकरण क्रमांक पर फर्जी पत्र तैयार किया गया था उसका मूल पत्र आवक जावक पंजी में एक स्टोन क्रेशर की जांच से संबंधित पाया गया। इसी तरह से कलेक्टर न्यायालय के अन्य प्रकरण में योजित प्रकरण में कूट रचना कर लीज स्वीकृति का पत्र तैयार किया। इसके जरिये नजूल भूमि पर अपना इंद्राज कराना चाहते थे। इसके अलावा इन्होंने एक अन्य कूटरचित पत्र तैयार कर पटवारी को दिया। न्यायालयीन आदेश का यह फर्जी पत्र पटवारी को दिया जाकर ऋण पुस्तिका जारी कराने की साजिश रची। इसकी जांच में पाया गया कि हीरालाल यादव और लक्ष्मण डोडानी ने फर्जी हस्ताक्षरों के जरिये शासकीय भूमियों को हड़पने का कुत्सित प्रयास किया है।

एसडीएम ने दिये एफआईआर के निर्देश

यह मामला सामने आने पर तहसीलदार ने इसे बकायदे नोटशीट में लेकर मामले को एसडीएम के समक्ष प्रस्तुत किया। जिस पर एसडीएम ने इस मामले में मैहर थाने में विस्तृत प्रतिवेदन के साथ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए। जिसे पर तहसीलदार ने थाना प्रभारी मैहर को 8 अक्टूबर 2021 को समस्त साक्ष्य सहित एफआईआर दर्ज करने पत्र दिया। लेकिन तहसील के सबसे बड़े अधिकारी एसडीएम के आदेश के बाद भी मैहर थाना पुलिस अभी तक इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं कर सकी है।

'' एसडीएम के आदेशानुसार मैहर थाना प्रभारी को साक्ष्य सहित एफआईआर के लिये पत्र अक्टूबर में दिया जा चुका है। गंभीर साजिश रची गई थी। अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई है।'' - मानवेन्द्र सिंह, तहसीलदार

'' जैसा बता रहे हैं उसमें तो मामला गंभीर है, इस प्रकरण को दिखवाते हैं।'' - धर्मवीर सिंह, पुलिस अधीक्षक