
सतना। सतना शहर को एक बड़े इंडस्ट्रियल पार्क की सौगात मिलने का रास्ता खुल गया है। बगहा स्थित इंडियन आयल डिपो की जमीन के मामले में उच्च न्यायालय ने शासन के पक्ष में फैसला दे दिया है। इस जमीन को वापस लेने के लिए मुआवजा पा चुके भू-स्वामियों ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की हुई थी। फैसले के बाद कलेक्टर अनुराग वर्मा ने एमपीआईडीसी के अधिकारियों के साथ मौका मुआयना कर यहां प्रस्तावित इंडस्ट्रियल पार्क प्रोजेक्ट की जानकारी ली।
यह है कहानी
सतना शहर के ग्रीन टाकीज के पास 90 के दशक में इंडियन ऑयल का डिपो था। यहां से कई राज्यों में पेट्रोल और डीजल की सप्लाई होती थी। 1997 में डिपो में एक बड़ा हादसा हुआ था। टैंकर में डीजल भरते वक्त आग लग गई थी। आग की भयावहता इतनी थी कि पूरा शहर हिल गया था। जिला अस्पताल से मरीज निकल कर भागने लगे थे। इसके बाद डिपो को शहर से बाहर करने के लिए आंदोलन शुरू हुए। तब इंडियन आयल ने इसे शहर से बाहर रेलवे लाइन के किनारे बगहा में ले जाने का प्लान तैयार किया। इसके साथ ही बगहा में 101 एकड़ के लगभग जमीन का अधिग्रहण किया। जिसमें लगभग 21 किसानों को मुआवजा देकर जमीन ली गई और कुछ शासकीय जमीन भी अधिग्रहीत की गई। यहां डिपो के टैंक बनाने के लिये हजारो ट्रक रेत भी बड़े बड़े कुए बनाकर डाली गई। लेकिन फिर से विरोध के स्वर उठने लगे। लगातार विरोध से आजिज आकर इंडियन आयल के उच्च प्रबंधन ने सतना प्रोजेक्ट को बंद करते हुए भिटौनी में डिपो बनाने का निर्णय लिया। इसके बाद खाली पड़ी जमीन को जिला उद्योग एवं व्यापार केन्द्र (डीआईसी) को दे दिया गया। 2011 में यह जमीन डीआईसी ने लगभग एक करोड़ रुपये इंडियन आयल को देकर अपने अधिपत्य में ली। इसके बाद यहां पर इंडस्ट्रियल पार्क बनाने का निर्णय लिया गया।
प्रोजेक्ट में आया पेंच
इंडस्ट्रियल पार्क बनाने के लिये डीआईसी से यह जमीन औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग को हस्तांतरित कर दी गई। लेकिन प्रोजेक्ट शुरू होता इससे पहले ही इस जमीन के पूर्व में भू-स्वामी रहे किसानों ने इस जमीन को वापस मांगना शुरू कर दिया। इनका कहना था कि डिपो के लिये जमीन अधिग्रहीत की गई थी। जब डिपो नहीं बन रहा है तो यह जमीन उन्हें वापस की जाए। शासन से यह मांग पूरी नहीं होने पर वे लोग उच्च न्यायालय की शरण में चले गए।
न्यायालय ने शासन के पक्ष में दिया फैसला
काफी लंबे समय तक न्यायालय में चले मामले में अब फैसला शासन के पक्ष में आ गया है। न्यायालय ने यह कहते हुए भू-स्वामियों की याचिका खारिज कर दी कि मुआवजा दिय जा चुका है। अब शासन यहां दूसरा प्रोजेक्ट प्रारंभ कर सकता है। इस फैसले के बाद अब यहां इंडस्ट्रियल पार्क बनाने का रास्ता साफ हो गया है।
सतना शहर को नई पहचान देगा इंडस्ट्रियल पार्क
अब तक विकास की मुख्य धारा से लगभग कटी रही कोठी रोड में विकास के नए पर लगने वाले हैं। सालों से विवाद में फंसी इंडियन ऑयल डिपो की जमीन अब शासन को मिलने के बाद यहां प्रस्तावित इंडस्ट्रियल पार्क तैयार करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। इसका पूरा प्रोजेक्ट पहले ही शासन को भेजा जा चुका था, विवाद की वजह से मामला अटका हुआ था। अब उच्च न्यायालय के फैसले के बाद यहां काम शीघ्रता से शुरू होगा। कलेक्टर अनुराग वर्मा ने गुरुवार को एमपीआईडीसी के ईडी के साथ स्थल का मौका मुआयना किया। इस दौरान एसडीएम सिटी नीरज खरे भी मौजूद रहे। एमपीआईडीसी (मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम) के ईडी ने कलेक्टर को बताया कि इस स्थल का प्लान पहले ही तैयार किया जाकर शासन स्तर पर भेजा जा चुका है। यहां पर अलग-अलग श्रेणी की इंडस्ट्रीज के हिसाब से प्लाट तैयार किये जाएंगे। इसके साथ ही यहां पर रोड, बिजली, पानी की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। शहर के निकट होने से यहां पर भूखंड निकलने में ज्यादा दिक्कत नहीं होगी।
कनेक्टिविटी पर चर्चा
पाया गया कि लगभग 101 एकड़ का यह क्षेत्र अभी रेलवे लाइन से लगा हुआ है लेकिन सड़क की कनेक्टिविटी अभी बहुत अच्छी नहीं है। रेलवे लाइन से अंडर ब्रिज द्वारा यहां वर्तमान में आ सकते हैं। इंडस्ट्रियल पार्क बनने के बाद यहां पर बड़े वाहनों का आवागमन काफी होगा। ऐसे में नई कनेक्टिविटी पर चर्चा की गई। लिहाजा तय किया गया कि इसे कोठी रोड से जोड़ा जाएगा। इसके लिये स्थानीय रास्ता जो मौजूद है उसे चौड़ा किया जाएगा। इसके लिये भू-अर्जन किया जाएगा। यहां पर 50 से 60 फीट चौडी रोड बनाई जाएगी।
प्लान अप्रूव होते ही काम प्रारंभ
ईडी एमपीआईडीसी ने बताया कि भोपाल हेडक्वार्टर से प्लान अप्रूव होते ही यहां पर काम शुरू कर दिया जाएगा। इसके लिये पूरी तैयारी की जा चुकी है। बताया गया कि इंडस्ट्रियल पार्क का विकास मटेहना इंडस्ट्रियल एरिया से ज्यादा बेहतर होगा और सुविधाएं भी यहां ज्यादा रहेंगी। जिससे इस क्षेत्र का औद्योगिक विकास तेजी से होगा।