सतना

जंगल से आई बाघ की दहाड़, इस तरह रेलवे ट्रैक छोड़कर भागे रेलकर्मी

बाघ होने का अंदेशा: मझगवां रेंज की टीम ने छाना जंगल, लेकिन नहीं मिले पगमार्क, ग्रामीणों से पूछताछ

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Dec 08, 2017
Tiger

सतना। मारकुंडी रेलवे स्टेशन के पास रेल की पटरी पर काम कर रहे रेलकर्मियों की उस समय घिग्घी बंध गई जब बगल में मौजूद जंगल से अचानक बाघ जैसे वन्य जीव के दहाडऩे की आवाज सुनाई देने लगी। बाघ की मौजूदगी की अपुष्ट खबर मझगवां स्टेशन मास्टर को दी गई। इसके बाद वन विभाग को सूचित किया गया।

भोर होते ही वन विभाग की टीम ने मारकुंडी के आसपास के गावों व जंगल को छान मारा, लेकिन बाघ के होने के निशान नहीं मिले। टीम द्वारा बारीकी से छानबीन करने बाद भी न ही कहीं शिकार और न ही पगमार्क दिखाई दिए।

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एरिया की पूरी सर्चिंग

मारकुण्डी स्टेशन के आसपास मौजूद गांव के लोग इस बात पर अडिग रहे कि इलाके में कुछ दिन से बाघ घूम रहा है, जिसकी दहाड़ रात में सुनाई देती है। इस मामले में मझगवां रेंजर का कहना है कि बाघ की मौजूदगी की फिलहाल न ही पुष्टि की जा सकती और न ही एक सिरे से नकारा जा सकता। एरिया की पूरी सर्चिंग के बाद ही कुछ पता चल सकता है।

1223/24 किमी. पर चल रहा था काम
जानकारी के अनुसार बुधवार-गुरुवार की रात करीब २ बजे सतना-मानिकपुर रेलखण्ड पर मारकुण्डी स्टेशन के पास किमी 1223/24 पर रेलकर्मी पटरियों को चेक कर रहे थे। उसी दौरान बाघ जैसे जानवर की दहाड़ सुनने का दावा किया। दहाड़ से भयभीत रेलकर्मी तुरंत भागते हुए स्टेशन पहुंचे व आधिकारियों को जानकारी दी। इसके बाद मझगवां स्टेशन में सूचना दी गई ताकि वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच वन्य जीव का पता लगा सके।

एक साल पहले ट्रेन की टक्कर से मरा था बाघ
रेलवे ट्रैक के आसपास बाघ होने या उसकी दहाड़ की अपुष्टि सूचना को भी वन विभाग गंभीरता से लेता है। एक साल पहले 5 दिसम्बर की रात चितहरा रेल ट्रैक के पास ट्रेन की टक्कर से एक नर युवा बाघ की मौत हो गई थी। उस बाघ की पहचान नहीं हो पाई थी कि वह पन्ना टाइगर रिजर्व या रानीपुर अभ्यारण्य से आया था। वन विभाग के अनुसार दो साल से जिले में बाघों का मूवमेंट बढ़ा है। वर्तमान में एक बाघ जिले के जंगलों में विचरण कर रहा है जिसकी निगरानी लगातार वन अमले द्वारा की जा रही है।

मझगवां रेलवे स्टेशन से सूचना मिली थी कि मारकुण्डी स्टेशन के पास बाघ मौजूद है। टीम के साथ इलाके की सर्चिंग की गई लेकिन कहीं पगमार्क नहीं मिले। हालांकि ग्रामीणों ने बताया कि रात में दहाडऩे की आवाज सुनाई देती है।
बीपी पाण्डेय, रेंजर मझगवां

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Published on:
08 Dec 2017 11:30 am
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