NEET 2026 Paper Leak: नीट पेपर लीक मामले में सीबीआई ने मांगीलाल बिवाल और उसके बेटे विकास बिवाल को गिरफ्तार किया है। जांच में विकास के मेडिकल कॉलेज में चयन और परीक्षा परिणाम को लेकर कई सवाल सामने आए हैं।
सवाईमाधोपुर। नीट परीक्षा 2026 पेपर लीक मामले ने देशभर में शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सीबीआई जांच में सामने आए तथ्यों ने न केवल इस साल की परीक्षा को कटघरे में खड़ा किया है, बल्कि 2025 की परीक्षा की विश्वसनीयता पर भी संदेह गहरा दिया है। जांच एजेंसियों ने मांगीलाल बिवाल और उसके बेटे विकास बिवाल को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद सीबीआई विकास बिवाल से लगातार पूछताछ कर रही है।
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गौरतलब है कि विकास पर 25 लाख रुपए में पेपर खरीदने का आरोप है। ऐसे में सीबीआई अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे नेटवर्क का विस्तार कहां-कहां तक है और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही। एजेंसी पूरे मामले की गहन जांच कर रही है। सीबीआई जांच में सामने आया कि मांगीलाल बिवाल का बेटा विकास सवाईमाधोपुर मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस प्रथम वर्ष का विद्यार्थी था।
पढ़ाई में उसका प्रदर्शन सामान्य रहा था। जनवरी से मई तक उसकी उपस्थिति भी काफी कम रही। इसके अलावा टेस्ट परीक्षाओं में उसे करीब 30 प्रतिशत अंक ही मिले थे। इसके बावजूद उसने नीट-2025 परीक्षा में 85 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल कर सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पा लिया। इसी बात ने जांच एजेंसियों को भी चौंका दिया है।
जांच में खुलासा हुआ कि मांगीलाल, दिनेश और उनके भाई घनश्याम के परिवार के कुल सात सदस्य पिछले दो वर्षों में नीट परीक्षा में शामिल हुए थे। इनमें से पांच सदस्य सफल रहे। विकास को सवाईमाधोपुर मेडिकल कॉलेज में प्रवेश मिला था। एक ही परिवार के इतने सदस्यों का एक साथ चयन होना अब जांच एजेंसियों के संदेह का बड़ा कारण बन गया है। विकास के शैक्षणिक रिकॉर्ड की बात करें तो 10वीं में उसे 63 प्रतिशत और 12वीं में केवल 55 प्रतिशत अंक मिले थे। वहीं नीट-2024 में उसके केवल 270 अंक आए थे। इसके बावजूद नीट-2025 में उसने असाधारण प्रदर्शन करते हुए सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश हासिल कर लिया।
दिनेश बिवाल ने 6 नवंबर 2025 को सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर परिवार के पांच बच्चों के एमबीबीएस में चयन की जानकारी साझा की थी। उस समय नीट-2025 परीक्षा को आधिकारिक रूप से लीक घोषित नहीं किया गया था, लेकिन सोशल मीडिया पर पेपर लीक के दावे जरूर सामने आए थे। तब एनटीए और साइबर एजेंसियों ने इन दावों को फर्जी बताया था। अब 2026 के खुलासों के बाद 2025 की परीक्षा की पारदर्शिता पर भी बड़े सवाल उठने लगे हैं।