सवाई माधोपुर

Guava Festival 2026: चार दशक में करमोदा से देश-विदेश तक पहुंचा सवाईमाधोपुर का अमरूद, किसानों की खुशहाली का बना आधार

‘गरीबों का सेव’’ कहलाने वाला अमरूद अब जिले की पहचान और किसानों की आजीविका का मजबूत आधार बन चुका है।

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कैरेट में रखे अमरूद। फोटो: पत्रिका

सवाई माधोपुर। ‘‘गरीबों का सेव’’ कहलाने वाला अमरूद अब जिले की पहचान और किसानों की आजीविका का मजबूत आधार बन चुका है। राजस्थान सरकार ने इसे एक जिला एक उत्पाद योजना के तहत चयनित किया है, जिससे स्थानीय किसानों को बाजार, प्रसंस्करण और ब्रांडिंग में नई संभावनाएं मिल रही हैं। सवाईमाधोपुर के मीठे अमरूद देशभर में मशहूर है। अमरूद की खेती ने किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है और यह फसल अब जिले की कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुकी है। जिले में बर्फखान गोला सहित अमरूद की अन्य किस्मोंं की विदेशों तक मांग हैं। वर्तमान में किसान अमरूद बेचने के लिए दिल्ली, आगरा, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल तक पहुंचते हैं।

करीब चार दशक पहले करमोदा गांव से शुरू हुई अमरूद की बागवानी आज सवाई माधोपुर जिले की पहचान बन चुकी है। उद्यानिकी विभाग के अनुसार परम्परागत खेती की तुलना में अमरूद की बागवानी से किसानों को पांच गुना तक अधिक लाभ होता है। यही कारण है कि किसान तेजी से पारंपरिक फसलों को छोड़कर अमरूद की ओर रुख कर रहे हैं। सवाईमाधोपुर का अनुकूल वातावरण अमरूद की खेती के लिए वरदान साबित हुआ है। करमोदा से शुरू हुई यह पहल अब जिले के साथ-साथ टोंक, करौली, दौसा और बूंदी तक फैल चुकी है। बढ़ती मांग के चलते अमरूद के पौधों की नर्सरी और बागवानी का दायरा लगातार बढ़ रहा है।

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इन गांवों में लगे हैं बगीचे

सूरवाल, करमोदा, दौंदरी, मथुरापुर, आटूनकलां, गुढ़ासी, शेरपुर-खिलचीपुर, श्यामपुरा, ओलवाड़ा, पढ़ाना, मैनपुरा, अजनोटी, भाड़ौती, सेलू, रांवल, गंगापुरसिटी और बामनवास सहित लगभग 15 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में अमरूद के बगीचे फैले हुए हैं। वहीं जिला मुख्यालय के आसपास रामसिंहपुरा, करमोदा और सूरवाल जैसे गांव अमरूद की पौध तैयार करने के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं।

किसानों के लिए नया अवसर

जानकारी के अनुसार देश का लगभग 50 प्रतिशत अमरूद उत्पादन अकेले सवाई माधोपुर जिले से होता है। यहां की बर्फखान गोला, लखनऊ 49, इलाहाबादी और सफेदा किस्म की पौध देशभर में मांग में रहती है। अमरूद से जैम, जूस और नेक्टर जैसे प्रसंस्कृत उत्पाद तैयार कर किसान अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। भारत विश्व में सबसे अधिक अमरूद उत्पादन करने वाला देश है और इसमें सवाई माधोपुर का योगदान सबसे बड़ा है। अब जिला प्रशासन और कृषि विभाग इसे अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की योजना बना रहे हैं।

फैक्ट फाइल

  • 15 हजार हैक्टेयर में अमरूदों के बगीचे
  • जिले में 20 हजार से अधिक कृषक परिवार कर रहे खेती
  • जिले में अमरूद की 27 मैट्रिक/ हैक्टेयर एवं कुल वार्षिक उत्पादन चार लाख मैट्रिक टन है।
  • जिले में उत्पादित अमरूद का अनुमानित वार्षिक बाजार मूल्य छह अरब है।

प्रदेश में बागवानी का 75 प्रतिशत हिस्सा जिले का

सरकार ने एक जिला एक उत्पाद योजना में अमरूद को शामिल कर इसकी महत्ता को मान्यता दी है। इसी आधार पर अमरूद महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है, ताकि किसानों और उपभोक्ताओं को सीधे जोड़ा जा सकें। जिले का वातावरण और जलवायु अमरूद की बागवानी के लिए सबसे उपयुक्त है। प्रदेश में होने वाली अमरूद की बागवानी का 75 प्रतिशत हिस्सा अकेले सवाई माधोपुर जिले से आता है। जिले में अमरूद का सालाना कारोबार छह अरब रुपए से अधिक है, जो किसानों की आय और जिले की पहचान दोनों को मजबूत करता है।
-चन्द्रप्रकाश बडाया, उपनिदेशक, उद्यान सवाईमाधोपुर

इम्युनिटी से लेकर वजन घटाने तक उपयोगी

अमरूद सस्ता और आसानी से उपलब्ध फल है, जिसमें पोषक तत्वों की भरपूर मात्रा होती है। इसमें विटामिन ‘सी’ प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और सर्दी-खांसी व संक्रमण से बचाव करता है। अमरूद में मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है और कब्ज, गैस व एसिडिटी जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है। इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होने के कारण यह डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल और हृदय रोगियों के लिए भी लाभकारी है। हाई फाइबर और कम कैलोरी की वजह से लंबे समय तक पेट भरा रहता है, जिससे वजन नियंत्रित करने में मदद मिलती है। अमरूद में एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन ए और सी पाए जाते हैं, जो त्वचा और बालों की सेहत के लिए फायदेमंद हैं। विटामिन ए आंखों की रोशनी को बेहतर बनाने में भी सहायक है। अमरूद हर वर्ग के लोगों के लिए सुलभ और सस्ता फल है, जिसका नियमित सेवन आमजन को कई बीमारियों से बचाव और स्वस्थ जीवन की ओर ले जाता है।
-डॉ. लोकेश गुप्ता, चिकित्साधिकारी, सामान्य चिकित्सालय सवाईमाधोपुर

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