सवाई माधोपुर

नीट पेपरलीक का भंडाफोड़ नहीं होता तो मेडिकल कॉलेज पहुंच जाता ऋषि बिंवाल

NEET 2026 Paper Leak: ऋषि बिंवाल, जमवारामगढ़ के खटीक मोहल्ला निवासी और नीट पेपरलीक प्रकरण के कथित मास्टरमाइंड बताए जा रहे दिनेश बिंवाल का बेटा है। आरोप है कि बेटे को डॉक्टर बनाने के लिए दिनेश बिंवाल ने अपने बड़े भाई मांगीलाल बिंवाल के साथ मिलकर लाखों रुपये में नीट परीक्षा का पेपर खरीदने का कथित सौदा किया था।
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NEET Paper Leak Accused Mangilal Binwal Son Missing
नीट पेपर लीक का आरोपी मांगीलाल बिंवाल। फोटो: पत्रिका

देशभर में सनसनी बने नीट परीक्षा 2026 पेपरलीक प्रकरण ने अब ऐसे चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए हैं, जिन्होंने शिक्षा व्यवस्था और मेडिकल प्रवेश प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि पेपरलीक का पर्दाफाश नहीं होता तो राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर से विज्ञान संकाय में ग्रेस मार्क्स के सहारे 12वीं पास करने वाला छात्र ऋषि बिंवाल भविष्य में चिकित्सक बन सकता था।

ऋषि बिंवाल, जमवारामगढ़ के खटीक मोहल्ला निवासी और नीट पेपरलीक प्रकरण के कथित मास्टरमाइंड बताए जा रहे दिनेश बिंवाल का बेटा है। आरोप है कि बेटे को डॉक्टर बनाने के लिए दिनेश बिंवाल ने अपने बड़े भाई मांगीलाल बिंवाल के साथ मिलकर लाखों रुपये में नीट परीक्षा का पेपर खरीदने का कथित सौदा किया था। सूत्रों के अनुसार ऋषि बिंवाल भी नीट परीक्षा 2026 में शामिल हुआ था और प्रकरण सामने आने के बाद से फरार बताया जा रहा है। जांच एजेंसियां उसकी तलाश में जुटी हुई हैं।

वायरल मार्कशीट ने उड़ाए होश

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही राजस्थान बोर्ड की सीनियर सेकेंडरी परीक्षा 2026 की मार्कशीट ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। मार्कशीट के अनुसार ऋषि बिंवाल ने जयपुर के नटाटा स्थित जानकी पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल से विज्ञान वर्ग में परीक्षा दी थी। छात्र को कुल 500 में से केवल 254 अंक प्राप्त हुए, यानी महज 50.80 प्रतिशत अंक।

परिणाम में साफ तौर पर “सेकंड डिवीजन बाय ग्रेस” अंकित है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि हिंदी विषय में छात्र को ग्रेस अंक देकर पास किया गया। वहीं फिजिक्स थ्योरी में मात्र 9 अंक प्राप्त हुए। केमिस्ट्री में 15 और बायोलॉजी में 20 अंक ही हासिल कर पाया। यदि प्रैक्टिकल और विद्यालय सत्रांक के अंक अलग कर दिए जाएं तो कई विषयों में पास होना भी मुश्किल नजर आता है।

थ्योरी में कमजोर, मेडिकल की तैयारी में शामिल

वायरल मार्कशीट सामने आने के बाद आमजन और सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जो छात्र बोर्ड परीक्षा में थ्योरी विषयों में बेहद कमजोर प्रदर्शन कर रहा था, वह देश की सबसे कठिन मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट में कैसे प्रतिस्पर्धा कर रहा था।

लोगों का कहना है कि यदि पेपरलीक का खुलासा नहीं होता तो ऐसा छात्र भविष्य में डॉक्टर बनकर चिकित्सा व्यवस्था का हिस्सा बन सकता था, जो समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

परिवार के पांच सदस्य पहले ही एमबीबीएस में चयनित

जांच एजेंसियों के अनुसार बिंवाल परिवार के पांच सदस्य पिछले दो वर्षों में नीट परीक्षा पास कर चुके हैं। इनमें से अधिकांश का राजस्थान के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस पाठ्यक्रम में चयन हो चुका है। हालांकि पेपरलीक प्रकरण उजागर होने के बाद परिवार के कई सदस्य कॉलेज जाना छोड़ चुके बताए जा रहे हैं।

जांच एजेंसियां जोड़ रही नेटवर्क की कड़ियां

सीबीआई सहित विभिन्न जांच एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क की गहन जांच में जुटी हैं। जांच का फोकस इस बात पर है कि आखिर किस प्रकार परीक्षा माफिया कमजोर शैक्षणिक रिकॉर्ड वाले विद्यार्थियों को अवैध तरीकों से मेडिकल कॉलेजों तक पहुंचाने का रास्ता तैयार कर रहा था। ऋषि बिंवाल की वायरल मार्कशीट ने इस पूरे पेपरलीक प्रकरण की गंभीरता को और बढ़ा दिया है तथा यह मामला अब केवल परीक्षा धांधली नहीं बल्कि देश की चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता से भी जुड़ता नजर आ रहा है।