सवाई माधोपुर

राजस्थान में यहां 200 साल पुरानी परंपरा आज भी जीवित, ट्रैक्टरों से परिक्रमा कर होती है गोवर्धन पूजा

Govardhan Puja: दीपावली पर भारजा नदी गांव में हर साल अनोखी परंपरा के तहत सामूहिक रूप से गोवर्धन पूजा की जाती है। ग्रामीण गोबर से विशाल गोवर्धन बनाकर ट्रैक्टरों से परिक्रमा करते हैं। दो सौ साल पुरानी यह परंपरा आज भी गांव की एकता और संस्कृति का प्रतीक है।

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सामूहिक गोवर्धन पूजा की अनोखी परंपरा (फोटो- पत्रिका)

Govardhan Puja: भाड़ौती (सवाई माधोपुर): दीपावली के अवसर पर कस्बे के समीप स्थित भारजा नदी गांव में हर वर्ष गोवर्धन पूजा की एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है। यहां वर्षों से पूरा गांव सामूहिक रूप से गोवर्धन पूजा करता है और आपसी भाईचारे का संदेश देता है।


बता दें कि यह परंपरा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि ग्रामीण संस्कृति और सामाजिक एकता की मिसाल भी है। गांव की महिलाएं सुबह से ही गोवर्धन पूजा की तैयारी में जुट जाती हैं। हर घर से गोबर इकट्ठा कर गांव के मुख्य मार्ग पर बड़े आकार का गोवर्धन बनाया जाता है।

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शुभ मुहूर्त में विधिवत पूजा-अर्चना होती है। इसके बाद गांव के किसान अपने ट्रैक्टरों से गोवर्धन की परिक्रमा करते हैं, फिर दोपहिया और चौपहिया वाहन भी इस परिक्रमा में शामिल होते हैं। इस दृश्य को देखने के लिए आसपास के गांवों से सैकड़ों लोग उमड़ते हैं। युवाओं द्वारा आतिशबाजी कर माहौल को और भी उत्सवमय बना दिया जाता है।


गांव के बुजुर्गों के अनुसार, करीब दो सौ वर्ष पूर्व कुछ घरों की बसावट से इस गांव की शुरुआत हुई थी। तभी से सामूहिक गोवर्धन पूजा की परंपरा चली आ रही है। पहले बैलों और हल जैसे पारंपरिक कृषि उपकरणों की पूजा होती थी, लेकिन समय के साथ बैलों की जगह ट्रैक्टरों ने ले ली।


अब गोवर्धन पूजा में ट्रैक्टरों की पूजा की जाती है और परिक्रमा भी उन्हीं से शुरू होती है। शाम को गांव का प्रत्येक व्यक्ति पूजा स्थल पर एकत्र होता है। महिलाएं आसपास के मकानों की छतों से दृश्य देखती हैं और ग्रामीण अपने वाहनों से गोवर्धन की परिक्रमा करते हैं।


अगले दिन महिलाएं गोबर को वापस ले जाती हैं और उससे ईंधन के लिए कंडे तैयार किए जाते हैं। यह परंपरा आज भी पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ निभाई जाती है, जो गांव की सांस्कृतिक विरासत और सामूहिकता की भावना को जीवंत बनाए रखती है।

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Published on:
23 Oct 2025 03:41 pm
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