विज्ञान और टेक्नोलॉजी

NASA इंसानों को फिर से चांद पर भेजेगा : पेंस

लाइटफुट ने कहा, उपराष्ट्रपति ने अंतरिक्ष में नए सिरे से अमरीकी नेतृत्व के लिए एक आह्वान की घोषणा की है

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Oct 07, 2017
Mike Pence
Mike Pence

वाशिंगटन। अमरीकी उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने कहा कि ट्रंप प्रशासन नासा को निर्देशित करेगा कि वह चांद पर लोगों को उतारने और लाल ग्रह या उससे आगे अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने से पहले चंद्रमा की स्तह पर उपस्थिति स्थापित करें। दि वर्गा ने गुरुवार को खबर दी कि पेंस ने वॉल स्ट्रीट जर्नल ऑप-एड में प्रशासन के इरादों को बताया, साथ ही नेशनल स्पेस काउंसिल की उद्घाटन बैठक में दिए एक भाषण में उन्होंने एक नए पुनरुत्थान वाले कार्यकारी समूह के उद्देश्य यूएस स्पेस एजेण्डा को मार्गदर्शन करने वाला बताया।

उन्होंने वर्जीनिया के चैंटिली में स्मिथसोनियन नेशनल एयर एंड स्पेस म्यूजियम के स्टीवन एफ उद्वार-हजी सेंटर में संवाददाताओं से कहा, हम नासा के अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा से वापस लाएंगे - न केवल पैरों के निशान और झंडे पीछे छोडऩे के लिए, बल्कि नींव बनाने के लिए, हमें अमेरिकियों को मंगल और उससे परे भेजना होगा।

पेंस ने स्पष्ट किया कि अंतरिक्ष एक राष्ट्रीय प्राथमिकता है, नासा के कार्यकारी प्रशासक रॉबर्ट लाइटफुट ने परिषद की पहली बैठक के बाद एक बयान में कहा। लाइटफुट ने कहा, उपराष्ट्रपति ने अंतरिक्ष में नए सिरे से अमरीकी नेतृत्व के लिए एक आह्वान की घोषणा की है - राष्ट्रपति की सिफारिश के साथ नासा आगे बढऩे और नेतृत्व करने में मदद कर रहा है।

लाइटफुट ने कहा, परिषद ने सीआईएस-चंद्र अंतरिक्ष के सामरिक महत्व को स्वीकार किया है। चंद्रमा के आसपास का क्षेत्र मंगल और उससे आगे के मिशन के लिए सिद्ध मैदान के रूप में काम करेगा।

अब, रोने से बनेगी बिजली
्रडबलिन। सब ठीक रहा तो आने वाले समय में आंसूओ की मदद से बिजली का उत्पादन किया जा सकेगा। जी हां, आपने ठीक पढ़ा। आयरलैंड के वैज्ञानिकों ने एक आंसूओं से बिजली उत्पादन का तरीका ढूंढ़ निकाला है। भविष्य में आंसूओं को बिजली बनाने के औजार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा और यह तरीका ज्यादा महंगा भी नहीं पड़ेगा। यही नहीं, बिजली उत्पादन के लिए इस्तेमाल होने वाली गैर अक्षय ऊर्जा पर भी निर्भरता कम होगी।

वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में रोने से आप अपना मोबाइल फोन भी चार्ज कर सकेेंगे। शोधकर्ताओं ने अपने शोध में पाया कि आंसूओं में मौजूद एक प्रोटीन पर दबाव डालने से वास्तव में बिजली का उत्पादन होता है। बिजली उत्पादन के लिए दबाव डालकर जो प्रक्रिया अपनाई जाती है उसे डायरेक्ट पाईजोइलेक्ट्रीसिटी कहा जाता है।

रिपोर्टों के मुताबिक, शोधकर्ताओं ने यह खोज दो इलेक्ट्रोड के बीच तत्वों को दबोचने के बाद उसमें से निकली ऊर्जा को नापा। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तकनीक का इस्तेमाल भविष्य में मेडिकल पार्टस जैसे पेसमेकर को बनाने में मदद मिलेगी।

Published on:
07 Oct 2017 11:10 pm