
ई-बुक्स (Representational Photo)
किताबें अब सिर्फ पढ़ी नहीं जाएंगी, आपसे बात भी करेंगी। अगर किसी रहस्य उपन्यास का कोई किरदार समझ में न आए, इतिहास की किसी घटना पर उलझन हो या दर्शन की कोई अवधारणा सिर के ऊपर से निकल जाए, तो अब अलग से गूगल खंगालने की जरूरत नहीं होगी। एआई आधारित नए 'बुक कंपैनियन' टूल्स पाठकों को उसी किताब से सवाल पूछने और उसी के आधार पर जवाब पाने की सुविधा दे रहे हैं। यह तकनीक पढ़ने के अनुभव को ज़्यादा संवादात्मक और सहज बना रही है। हालांकि इसके साथ ही कॉपीराइट, लाइसेंसिंग और लेखकों की रॉयल्टी को लेकर नई कानूनी बहस भी तेज़ हो गई है।
एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI - Artificial Intelligence) का प्रभाव अब किताबों पर भी देखने को मिल रहा है, जिससे पढ़ने का अनुभव बदल गया है। ई-बुक, ऑडियोबुक या डिजिटल पुस्तक पढ़ते समय अगर पाठक किसी पात्र, कथानक, ऐतिहासिक संदर्भ या जटिल विचार को लेकर सवाल पूछता है, तो एआई सिर्फ उसी पुस्तक के मूल पाठ का विश्लेषण कर उत्तर देता है। इससे बाहरी या भ्रामक जानकारी शामिल होने की संभावना कम रहती है।
कई कंपनियों का दावा है कि वो सिर्फ सार्वजनिक डोमेन की पुस्तकों या लेखक और प्रकाशक की अनुमति प्राप्त किताबों का ही उपयोग करती हैं और 'एआई राइट्स' के तहत रॉयल्टी भी देती हैं। हालांकि कुछ प्लेटफॉर्म्स ऐसे भी हैं, जहाँ बिना कॉपीराइट जांच के कोई भी पीडीएफ या पुस्तक अपलोड की जा सकती है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह तकनीक छात्रों, शोधकर्ताओं और जटिल विषय पढ़ने वाले पाठकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी हो सकती है। कठिन किताबों को समझना आसान होगा और हर सवाल के लिए अलग स्रोत तलाशने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
Sinai.ai / My Smart Book - सिर्फ मूल पुस्तक के आधार पर प्रश्नों के उत्तर।
Audible - ऑडियोबुक सुनते-सुनते सवाल पूछने और उसी स्थान से दोबारा सुनने की सुविधा।
Kindle - कहानी का सस्पेंस उजागर किए बिना कथानक और पात्रों को समझाना।
iChatbook - किताब के विचारों का आसान भाषा में सार और व्याख्या।
लेखक संगठनों का कहना है कि अगर एआई उनकी किताबों के आधार पर जवाब दे रहा है, तो इसके लिए स्पष्ट लाइसेंस, लेखक की सहमति और रॉयल्टी की व्यवस्था अनिवार्य होनी चाहिए। इसी मुद्दे पर एमेजान के 'आस्क द बुक' जैसे फीचर को लेकर ऑथर्स गिल्ड ने आपत्ति जताई है।
Updated on:
31 Jul 2026 05:41 am
Published on:
31 Jul 2026 05:41 am
