किताबें अब सिर्फ पढ़ी नहीं जाएंगी, आपसे बात भी करेंगी। अगर किसी रहस्य उपन्यास का कोई किरदार समझ में न आए, इतिहास की किसी घटना पर उलझन हो या दर्शन की कोई अवधारणा सिर के ऊपर से निकल जाए, तो अब अलग से गूगल खंगालने की जरूरत नहीं होगी। एआई आधारित नए 'बुक कंपैनियन' टूल्स पाठकों को उसी किताब से सवाल पूछने और उसी के आधार पर जवाब पाने की सुविधा दे रहे हैं। यह तकनीक पढ़ने के अनुभव को ज़्यादा संवादात्मक और सहज बना रही है। हालांकि इसके साथ ही कॉपीराइट, लाइसेंसिंग और लेखकों की रॉयल्टी को लेकर नई कानूनी बहस भी तेज़ हो गई है।