Shahjahanpur Police News : शाहजहांपुर पुलिस की शर्मनाक करतूत! बालिग युवती के बयानों में हेरफेर कर प्रेमी को फंसाने की साजिश रची। कोर्ट में वीडियोग्राफी ने खोला पुलिस का झूठ, अब विवेचक पर गिरी निलंबन की गाज।
शाहजहांपुर: उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले से पुलिस की कार्यप्रणाली को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है। यहां जलालाबाद थाने की पुलिस ने एक बालिग युवती के बयानों में हेरफेर कर उसे साजिश का हिस्सा बनाने की कोशिश की। लेकिन पुलिस की यह 'जालसाजी' अदालत की चौखट पर टिक नहीं सकी और अब विभाग के भीतर ही हड़कंप मचा हुआ है।
मामला एक प्रेम प्रसंग से जुड़ा है। जलालाबाद इलाके की एक 19 वर्षीय युवती अपने 24 वर्षीय प्रेमी के साथ मर्जी से राजस्थान चली गई थी। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने युवती को बरामद किया। कानूनन, बालिग होने के कारण युवती की मर्जी सर्वोपरि थी। पुलिस ने युवती के बयान दर्ज किए और उसकी वीडियोग्राफी भी की। युवती ने वीडियो में स्पष्ट कहा कि वह अपनी इच्छा से युवक के साथ गई थी।
जब पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट और कागजात दाखिल किए, तो वहां कहानी पूरी तरह बदल दी गई। विवेचक और बयान लेखक ने लिखित दस्तावेजों में युवती की मर्जी को 'मर्जी नहीं थी' में बदल दिया ताकि युवक पर अपहरण और दुष्कर्म जैसी गंभीर धाराएं लगाई जा सकें। पुलिस ने सोचा था कि कागजों के सामने युवती की आवाज दब जाएगी, लेकिन सच ज्यादा देर नहीं छुपा।
आरोपी युवक ने हार नहीं मानी और अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनीष सिंह की अदालत में प्रार्थना पत्र देकर वीडियोग्राफी की जांच की मांग की। कोर्ट के आदेश पर जब साक्ष्यों का मिलान किया गया, तो जज भी हैरान रह गए। पुलिस के कागजों में युवती 'मजबूर' थी, जबकि वीडियो में वह 'सहमत' दिख रही थी। कोर्ट ने इसे न्यायिक प्रक्रिया के साथ बड़ा खिलवाड़ माना।
इस गंभीर चूक और जालसाजी का संज्ञान लेते हुए एसपी ग्रामीण दीक्षा भाबरे ने कड़ा रुख अपनाया है। जांच में विवेचक, बयान लेखक और थानाध्यक्ष की भूमिका संदिग्ध पाई गई। मुख्य रूप से विवेचक को दोषी मानते हुए उनके निलंबन की संस्तुति कर दी गई। कोर्ट में यूपी पुलिस की पोल खुल गई। शाहजहांपुर पुलिस का 'रस्सी का सांप' बनाने वाला यह तरीका खुद उन्हीं पर भारी पड़ गया।