पुतला जलते ही टूट पड़ते हैं लोग, प्रसाद चढ़ाकर पाँव भी छूते है
शाहजहाँपुर। भले ही रावण का पुतला बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में दशहरे के दिन जलाया जाता है लेकिन शाहजहाँपुर में लोगों के लिए रावण का पुतला और उसकी अस्थिया बेहद मायने रखती हैं। दशहरे में जब रावण के पुतले में आग लगाई जाती है तो सभी जय श्री राम का नारा तो लगाते ही है साथ ही रावण के पुतले के जलने का भी बेसब्री से इन्तजार करते हैं। क्योंकि रावण के पुतले के जलते ही शुरू हो जाता है उसकी अस्थियां बंटोरने की जददोजहद। क्या बच्चे क्या बड़े सभी अपनी जान की परवाह किये बगैर ही जलते हुए पुतले से उसकी अस्थियां खींचकर भागने लगते है। इतना ही नहीं रावण के पुतले की बूढ़े बच्चे जवान सभी पूजा करते है और प्रसाद चढ़ाकर पाँव भी छूते है।
जिससे कई लोग खुद को जला भी बैठते है लेकिन उन्हे हर हाल में रावण की अस्थियां चाहिए। आखिर ये लोग ऐसा क्यों करते है ये सवाल भी लोगों की आस्था से जुड़ा हुआ है। मेला प्रबंधक नीरज वाजपेयी के अनुसार हिन्दू धर्म में लोगों का मानना है कि लंका का रावण दुनियां का सबसे ज्ञानी पुरूष माना जाता था। साथ पूरी धरती के भूत परेत उससे खौफ खाते थे इसलिए लोगों की ऐसी आस्था है कि अगर रावण के पुतले ही अस्थियों को घर पर ले जाकर संभाल कर रखा जाये तो घर मेें दुष्ट आत्माएं प्रवेश नहीं कर सकती है। इसके अलावा बच्चों में ज्ञान बढ़ता है।
यह भी एक बड़ी मान्यता है कि रावण के पुतले की अस्थियों को चारपाई में लगा देने से उसमें खटमल नहीं हो सकतेे है। यहीं कारण है कि दशहरे के दिन रावण के जलते हुए पुतले से लोग अपनी जान की परवाह किये बगैर हर हाल में उसकी अस्थि ले जाने के भरकस कोशिश करते है। शायद इन लोगों के लिए असली दशहरा यहीं है। ख़ास बात ये भी है कि दशहरा के दिन महिला पुरुष खुद और अपने अपने बच्चो के साथ रामलीला मैदान में जाकर रावण को प्रसाद भी चढ़ाते है और पाँव छूंकर आशीर्वाद भी लेते है।
आपको बता दे कि रामलीला मैदान में रावण और कुम्भकर्ण के पुतलो को जब आग लगाई जाती है तो अस्थियो के लुटेरों से बचाने के लिए अग्निशमन विभाग पुलिस व् पीएसी के जवान पूरी तरह से चारो ओर से पुतलों को घेर लेते है। क्योंकि इन पुतलों में भारी आवाज के गोले भी लगाए जाते हैं। क्योंकि इनमें लगे पटाखे देर तक जलते रहते है। लेकिन अस्थियों के लुटेरे फिर भी आग और पटाखों से होने वाली दुर्घटनाओं को नजरंदाज कर जान जोखिम में डाल रावण की अस्थियां लूटने जाते है।