कांच के कारखाने में काम कर रहे कर्मचारी ने मालिक की उधारी से परेशान होकर जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली।
सीकर. उद्योग नगर थाना इलाके में कांच के कारखाने में काम कर रहे कर्मचारी ने मालिक की उधारी से परेशान होकर जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली। सुसाइड नोट के मुताबिक मालिक ने उसके दस्तावेजों से लोन व ब्याज पर रुपए ले रखे थे। समय पर नहीं चुकाने पर लेनदार उसे परेशान कर रहे थे। इससे दुखी होेकर उसने धुलंडी की रात मौत को गले लगा लिया। सुसाइड नोट में उसने अपने बच्चों के अनाथ होने की वजह मालिक को ही बताया। रुपए लेकर भागने वाली कंपनियों के खिलाफ भारत सरकार के नाम भी संदेश भेजा। वार्ड न. 29 के अनाड़ी कोठी निवासी मृतक रामरतन सैनी (40) पुत्र गिरधारीलाल सैनी के शव का पोस्टमार्टम करवा पुलिस ने कारखाना मालिक पंकज शर्मा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। थानाधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि मामले की गहनता से जांच की जा रही है।
मृतक रामरतन एक बेटे व एक बेटी का पिता था। बेटा दादा—दादी के पास था। बेटी व पत्नी को वह आत्महत्या से पहले ही ससुराल छोड़ आया था। ससुराल से दोपहर में लौटकर उसने नजदीकी लोगों से मुलाकात भी की। इसके बाद रात को उसने जहरीला पदार्थ खाया। पास रहने वाला भाई धर्मेंद्र जब घर पहुंचा तो वह बेसुध हालत में मिला। एसके अस्पताल ले जाने पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
सुसाइड नोट में उसने पत्नी संतोष से माफी मांगी। लिखा कि 'संतोष मेरे को माफ करना जो मैं तेरे से किए हुए वचन को नहीं निभा सका। मुझे क्या मालूम था कि मैं किसी कि बातों में आकर इस तरह उलझ जाऊंगा।' भाई धर्मेंद्र को परिवार संभालने की जिम्मेदारी भी सौंपी।
घटना के बाद कॉलोनी के लोगों ने एसके अस्पताल में आक्रोश जताया। उन्होंने पंकज के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने के साथ मृतक के नाम पर उठाए गए लोन माफ करने की मांग की। सुरेश व राजेश सैनी ने बताया कि मृतक फतेहपुर रोड पर पिंक हाउस की गली में एल्युमिनियम व कांच के कारखाने पर काम करता था। उसके मालिक पंकज ने ही उसे आत्महत्या के लिए मजबूर किया है। ऐसे में उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
सुसाइड नोट के मुताबिक पंकज के लोन पर 40 से 45 हजार रुपए की किश्त आ रही थी, जो वह नहीं चुका रहा था। लोन रामरतन के नाम होने की वजह से एजेंट उसे परेशान कर रहे थे। पंकज के नाम ही लिखे नोट में उसने लिखा कि भाईजी आप ऑनलाइन लोन पर लोन लेते रहे। दूसरों से ब्याज पर भी रुपए मंगवा लिए, लेकिन जब चुकाने की बारी आई तो रंग दिखा दिया। मेरे बच्चों के अनाथ होने का कारण आप ही होंगे। पत्र में उसने केंद्र सरकार से लोगों के रूपए जमा कर भागने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।