एसके अस्पताल में अचानक से जिला कलक्टर पहुंच गए। जिससे एक बार तो अस्पताल में हड़कंप मच गया।
सीकर.
जिले के सबसे बडे कल्याण अस्पताल की बदइतंजामी की पोल शुक्रवार को कलक्टर के निरीक्षण में खुल गई। अस्पताल प्रबंधन की अनदेखी का हाल यह था कि सुबह पौने नौ बजे के बाद भी वार्डों में सफाई हो रही थी। अस्पताल में जगह-जगह मरीज लाइन में खड़े थे। ट्रोमा में आने वाले मरीजों के ट्रॉली मैन नहीं थे। कलक्टर नरेश कुमार ठकराल ने अस्पताल में अव्यवस्थाओं पर नाराजगी जाहिर की और अस्पताल प्रबंधन को सुधार के निर्देश दिए। इस दौरान एडीएम जयप्रकाश, पीएमओ डा एसके शर्मा, डिप्टी कंट्रोलर डा. हरि सिंह, नर्सिंग अधीक्षक बजरंगलाल मीणा मौजूद रहे।
Must read:
पहले जांचा रजिस्टर, फिर किया वार्डों का दौरा
औचक निरीक्षण पर आए जिला कलक्टर सबसे पहले पीएमओ चैम्बर पहुंचे और नर्सिंग कर्मचारियों की उपस्थिति के रजिस्टर मंगवाए। रजिस्टर में खाली कॉलम देखकर कलक्टर ने नाराजगी जाहिर की। इसके बाद कलक्टर ने अस्पताल के सभी वार्ड देखे। सबसे अंत में ट्रोमा यूनिट में पहुंचे, इस दौरान उन्होंने ट्रोमा ओटी शुरू करने के प्रबंधन को स्टॉफ उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
एक जगह काउंटर
निरीक्षण के दौरान अस्पताल के मुख्य गेट, ओपीडी पर्ची काउंटर, डीडीसी पर लाइन मिली। इस पर कलक्टर ने पीएमओ को सभी काउंटरों को एक जगह करने के कहा। साथ ही भामाशाह काउंटर पर ही मरीज को योजना के बारे में पूरी जानकारी देने के निर्देश दिए।
Must read:
बायोवेस्ट मैनेजमेंट सुधारें
वार्डों को देखने पहुंचे अधिकारियों ने जब देखा कि अस्पताल में बायोवेस्ट का मैनेजमेंट सही नहीं हो रहा तो नर्सिंग कर्मचारियों को फटकार लगाई और थैली के रंग के अनुसार बायोवेस्ट डालने के निर्देश दिए।
खाली भवनों को लें काम में
अस्पताल परिसर में एमसीडब्ल्यू विंग का भवन अनुपयोगी है। जबकि कई वार्डों में क्षमता से अधिक मरीज हैं। इसे देखते हुए प्रबंधन को इस अनपुयोगी भवन में मरीजों को शिफ्ट करने के लिए कहा। इस दौरान कलक्टर ने मेडिकल कॉलेज से अटैच होने वाले कल्याण अस्पताल के भवन में नए निर्माण की संभावनाएं देखी। उन्होंने प्रबंधन से अस्पताल परिसर लैब और उसके पास बने कॉटेज वार्ड को हटाकर पांच सौ बैड के दो मंजिला भवन बनाने की संभावनाएं भी तलाशने के निर्देश दिए।