सीकर में नौ साल पुराने पूर्व सरपंच सरदार राव हत्याकांड में एससी-एसटी कोर्ट ने तीन मुजरिमों को आजीवन कारावास और छह को दस-दस साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
सीकर। जुराठड़ा ग्राम पंचायत के पूर्व सरपंच सरदार राव हत्याकांड केस में एससी-एसटी कोर्ट की न्यायाधीश रेणुकासिंह हुड्डा ने सुपारी देने वाले मुख्य सूत्रधार व दो शूटरों सहित तीन मुजरिमों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। वहीं रैकी करने और सहयोग देने वाले छह मुजरिमों को 10-10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और एक अन्य मुजरिम यतेंद्रसिंह को संदेह का लाभ देते हुए बरी किया गया है। न्यायालय का फैसला नौ साल बाद आया है। एससी-एसटी कोर्ट, सीकर के सहायक निदेशक अभियोजन रामलाल सैनी ने बताया कि गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जोड़ा गया था।
वहीं, लॉरेंस बिश्नोई गैंग का सहयोगी और हत्याकांड की वारदात की प्लानिंग करने तथा शूटरों की रहने, खाने, होटल में ठहरने और पैसों की व्यवस्था करवाने वाला हिस्ट्रीशीटर सुभाष बराल अभी फरार चल रहा है। वह जमानत पर आने के बाद जयपुर के एक व्यवसायी से फिरौती मांगने के बाद विदेश भाग गया था। मुजरिमों को कड़ी सुरक्षा के बीच न्यायालय लाया गया और इसके बाद उन्हें सजा सुनाई गई।
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एडीपी रामलाल सैनी ने बताया कि पूर्व सरपंच की हत्या की साजिश रचने वाले हरदेवराम मूंड निवासी बराल और शूटर हरविंदरसिंह उर्फ मन्नू निवासी पंजाब तथा अरुण छुरीमार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। शूटरों को रैकी करने में मदद करने और होटलों में ठहराने वाले छह मुजरिम ओमप्रकाश मूंड, मुकेश कुमार, भानूप्रताप, सुनील, कुलदीप और नरेंद्र को 10-10 साल का कठोर कारावास दिया गया है।
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