प्रेमानंद का उल्लास ऐसा छाया कि भक्तों के ह्रदय में ना समाकर चारों और ही उमड़ गया।
सीकर.
आंखों में आनंद के आंसू.. ह्रदय में प्रेम का अतिरेक..भक्ति के भाव से भरा मन और देह की सुधि बिसराए झूमता हर भक्तगण.. साध्वी जया किशोरी की भक्ति गीतों की स्वर लहरियां जब भाव के साथ विद्याश्रम स्कूल में गूंजी, तो रोमांच से भरे रोम- रोम के साथ हर कोई भाव विह्वल था। प्रेमानंद का उल्लास ऐसा छाया कि भक्तों के ह्रदय में ना समाकर चारों और ही उमड़ गया। विद्याश्रम स्कूल में पुष्प वर्षा के बीच समधुर सुरों की मस्ती में ‘फागोत्सव’ का रंग ऐसा चढ़ा की हर कोई श्याम के रंग में रंग गया। फिर तो भजनों की झड़ी भी ऐसी लगी कि तन मन की सुध भूल सभी प्रेमाश्रुओं के सावन में भीगते से नजर आए।
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‘बता मेरे यार सुदामा रे’ और हम तुम्हारे हैं प्रभु जी सरीखे भजनों ने तो थिरकने के साथ लोगों को बरबस ही गुनगुनाने पर भी मजबूर कर दिया। जयकारों का तो यह आलम था कि करीब दो घंटे के कार्यक्रम में रह रहकर पूरे समय ही कभी श्याम तो कभी श्रीकृष्ण की जय का जयघोष गूंजता ही रहा।उस पर जया किशोरी ने जब नानी बाई का मायरा का प्रसंग सुनाया, तो भक्ति का रस ओर ज्यादा अमृतमयी हो गया। भगवान श्रीकृष्ण- राधा की अनुपम झांकी दर्शन के बीच कार्यक्रम की शुरुआत जया किशोरी के स्वागत सत्कार से हुई। इस दौरान अंजू ठकराल, जिला साक्षरता व सतत शिक्षा अधिकारी राकेश लाटा, महावीर पांडे, पुरुषोत्तम शर्मा, पवन बुटोलिया, बाबूलाला शर्मा, राधेश्याम सुल्तानिया, शिवकुमार आदि मौजूद रहे।
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