
सीकर। दो साल सियासत में उलझे शिक्षानगरी सीकर के मास्टर प्लान को लेकर यूडीएच मंत्री व पीसीसी चीफ आमने-सामने हो गए है। यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि मास्टर प्लान का दर्द सिर्फ कांग्रेसियों के पेट में हो रहा है। उन्होंने कहा कि मास्टर प्लान की चिन्ता भूमाफियाओं को सबसे ज्यादा है। खर्रा ने कहा कि पिछली सरकार ने मास्टर प्लान के नाम पर पाप करने का काम किया था। अब भाजपा की सरकार तो इस पाप को धोने में लगी हुई है। उन्होंने कहा कि मास्टर प्लान के लिए टीम काम कर रही है।
इधर, शाम को छात्र संवाद कार्यक्रम के बाद पीसीसी चीफ गोविन्द सिंह डोटासरा ने कहा कि मास्टर प्लान यदि सीकर की जनता नहीं चाहती तो फिर सरकार निरस्त क्यों नहीं कर देती। उन्होंने कहा कि यूडीएच मंत्री ने पहले मास्टर प्लान को सही कराने के नाम पर एक साल तक रोके रखा। जब संतुष्ट हुए होंगे तभी तो खुद ने नगर परिषद में मास्टर प्लान के प्रारूप का प्रकाशन किया था। जब जनता ने विरोध किया तो खुद के समय हुए पाप का दोष कांग्रेस पर डाल रहे है। वहीं नीट परीक्षा मामले में भी दोनों नेताओं ने एक दूसरे को घेरा।
यूडीएच मंत्री खर्रा ने कहा कि यूआइटी की ओर से विकसित की जाने वाली कॉलोनियों को जल्द धरातल पर लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगले महीने तक इन कॉलोनियों को मंजूरी दिलाने का पूरा प्रयास है। नगर परिषद में खाली जमीन होगी तो वहां भी आवासीय कॉलोनी विकसित की जाएगी। खर्रा ने कहा कि सफाई कर्मचारियों की भर्ती के लिए सरकार ने पूरी तैयारी कर ली है। पहले अनुभव के आधार पर यह भर्ती होनी थी, लेकिन विवाद होने से रोक दिया था। अब अक्टूबर में नए सिरे से भर्ती कराई जाएगी।
इधर पीसीसी चीफ डोटासरा ने कहा कि भाजपा पहले सीकर नगर परिषद को नगर निगम बनाने की बातें करती थी दो साल में तो बनी नहीं। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार आने पर सीकर की संभाग, नगर निगम व नीमकाथाना को जिला बनाने की मांग पूरी होगी। उन्होंने कहा कि जब मास्टर प्लान ही नहीं लाना तो फिर शहरी सीमा में 80 गांव-ढाणियों को क्यों जोड़ा गया।