
सीकर। राजस्थान में वरिष्ठ अध्यापकों की जारी हुई तबादला सूची सरकार की 'बदला सूची' के रूप में चर्चा में है। इसकी वजह जिले में प्रशासनिक तबादलों की संख्या है। दरसअल, प्रदेश में सबसे ज्यादा 257 प्रशासनिक तबादले सीकर जिले में हुए है। इनमें भी सबसे ज्यादा 147 प्रशासनिक स्थानांतरण पीसीसी चीफ गोविंदसिंह डोटासरा के लक्ष्मणगढ़ विधानसभा क्षेत्र में हुए है। चूंकि बिना किसी मांग के होने की वजह से प्रशासनिक तबादलों को सजा के तौर पर देखा जाता है।
लिहाजा इतनी संख्या में बेमर्जी से हुए स्थानांतरण को शिक्षा मंत्री और पीसीसी चीफ की सियासी अदावत के रूप में देखा जा रहा है। प्रशासनिक आधार पर तबादलों से सरकारी कोष पर पड़ने वाले आर्थिक भार को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए जा रहे है। चूरू मंडल में कुल 356, इनमें से 257 सीकर के मंडलवार हुए तबादलों में चूरू मंडल में कुल 808 वरिष्ठ अध्यापकों के तबादले हुए। इनमें से कुल 356 वरिष्ठ अध्यापक प्रशासनिक आधार पर अदल-बदल किए गए।
सीकर जिले में इनमें से 400 यानी करीब आधे शिक्षकों के स्थानांतरण हुए, जिनमें से 64 फीसदी की दर से सबसे ज्यादा 257 शिक्षकों को प्रशासनिक आधार के बहाने बदला गया है। जबकि प्रदेशभर का अनुपात देखें तो कुल 6185 में से करीब 25 फीसदी शिक्षकों का तबादला ही प्रशासनिक आधार पर हुआ है। ऐसे में दो गुना से भी ज्यादा शिक्षकों का उनकी इच्छा के विरुद्ध तबादला शिक्षा और सियासत दोनों गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
प्रशासनिक आधार पर किए गए तबादलों से सरकार पर आर्थिक बोझ भी बढ़ेगा। क्योंकि इन शिक्षकों को 10 दिन की पीएल के साथ सरकार को टीए-डीए भी देना होगा। आकलन करने पर इससे सरकार पर औसतन 40 हजार रुपए का भार प्रति शिक्षक आएगा। ऐसे में ये सियासी दाव सरकारी कोष पर छह करोड़ रुपए से ज्यादा का आर्थिक भार डालेगा।
प्रदेश में सबसे ज्यादा तबादले जयपुर मंडल में 918 हुए। इनमें से 336 तबादले प्रशासनिक आधार पर किए गए। इसी तरह भरतपुर में 519 में से 141, उदयपुर में 869 में से 180, जयपुर में 918 में से 336, जोधपुर में 616 में से 111, पाली में 363 में से 43, अजमेर में 854 में से 167 और कोटा में 723 में से 145 वरिष्ठ अध्यापकों का तबादला प्रशासनिक कारणों से किया गया।
धोद क्षेत्र के मौल्यासी गांव में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय मौल्यासी की प्रधानाध्यापिका तबादले के विरोध में ग्रामीणों ने बुधवार को स्कूल के मुख्य गेट पर तालाबंदी कर धरना शुरू कर दिया। ग्रामीणों का कहना था कि प्रधानाध्यापिका ने स्कूल की शिक्षा व व्यवस्था के लिए बेहतरीन कार्य किया है। इसके बावजूद भी उनका तबादला करने पर ग्रामीणों में आक्रोश है। उन्होंने तबादला रद्द नहीं होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी है।
लक्ष्मणगढ़ में प्रशासनिक आधार पर बड़े पैमाने पर हुए तबादलों को लेकर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंदसिंह डोटासरा ने भाजपा सरकार पर राजनीतिक दुर्भावना का आरोप लगया। उन्होंने सोशल मीडिया पर बताया कि उनके क्षेत्र के 252 सरकारी विद्यालयों में करीब 50 प्रतिशत पद रिक्त हो गए हैं, जिससे लगभग 14 हजार विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होगी। लिखा कि क्षेत्र में 174 में से 84.48 फीसदी की दर से 147 वरिष्ठ अध्यापकों के तबादले प्रशासनिक आधार पर हुए हैं। व्याख्याताओं के भी 85.31 और प्रधानाचार्यों के 87.65 प्रतिशत स्थानांतरण प्रशासनिक आधार पर कर उन्हें निशाना बनाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से चूरू मंडल के तबादलों की निष्पक्ष समीक्षा व जांच की मांग की है। इससे पहले कम नामांकन के आधार पर महात्मा गांधी स्कूलों में हिंदी माध्यम शिक्षण शुरू करने की सरकार की कवायद में भी प्रदेश में सबसे ज्यादा नाम लक्ष्मणगढ़ विधानसभा क्षेत्र की 21 स्कूलों को शामिल किया गया था। इसे भी शिक्षा मंत्री और पूर्व मंत्री की सियासी तकरार से जोड़कर देखा गया था।
राजस्थान शिक्षक संघ के प्रदेशाध्यक्ष सहित राज्य व जिला कमेटी के कई शिक्षक सदस्यों का भी प्रशासनिक आधार पर तबादला किया गया है। प्रदेशाध्यक्ष उपेंद्र शर्मा को खूड़ी बड़ी से चूरू के रतनगढ़, राज्य कमेटी सदस्य श्रवणकुमार थालौड़ को भगतपुरा से चूरू, सुरेंद्र सैनी को नीमकाथाना से फतेहपुर व सुमन भानुका को हरदयाल स्कूल से ताजसर फतेहपुर और जिला कमेटी सदस्य महावीर भामू को जैतपुरा, नेछवा से चूरू स्थानांतरित किया गया है। इसके भी सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। इधर, घटते नामांकन के बीच शिक्षकों को प्रताड़ित कर प्रदेश का शैक्षिक माहौल खराब करने व सरकारी कोष पर आर्थिक भार बढ़ाने का आरोप लगाते हुए संघ ने सूची के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी भी दी है। सभाध्यक्ष महावीर सिहाग व जिलाध्यक्ष विनोद पुनियां ने कहा कि मामले में जल्द बड़ा जन आंदोलन चलाया जाएगा।