सीकर

शेखावाटी के छोटे से गांव के हेमंत भुकर का इसरो में वैज्ञानिक ‘ए’ पद पर चयन, देश में हासिल की 7वीं रैंक

Hemant Kumar Bhukar ISRO: सीकर जिले के छोटे से गांव गोठड़ा भुकरान निवासी हेमंतकुमार भुकर का ऑल इंडिया 7वीं रैंक के साथ इसरो में वैज्ञानिक ‘ए’ पद पर चयन हुआ है।
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Aug 19, 2026
Hemant Bhukar
Hemant Bhukar. Photo- Patrika

Hemant Kumar Bhukar ISRO: सपने वही नहीं होते, जो सोते हुए देखे जाएं। असली सपने वे हैं, जिन्हें पूरा करने तक सुकून की नींद नहीं आए। देश के लिए कुछ कर गुजरने के लिए इसरो में वैज्ञानिक बनने का ऐसा ही एक सपना सीकर जिले के छोटे से गांव गोठड़ा भुकरान निवासी हेमंतकुमार भुकर ने भी देखा। जिसे पूरा करने के लिए इंटेल कंपनी में चिप डिजाइनिंग की नौकरी करते हुए भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी। आखिरकार मुश्किलों पर मेहनत भारी पड़ी और अब ऑल इंडिया 7वीं रैंक के साथ वैज्ञानिक ‘ए’ पद पर चयन हासिल कर उन्होंने कामयाबी का नया किला फतेह कर लिया है। इसरो में काम के अवसर को ही सौभाग्य मानने वाले भुकर अब अपने योगदान से देश के तकनीकी विकास को नई बुलंदियों पर पहुंचाने को अपना मिशन मान रहे हैं।

अच्छी नौकरी थी, लेकिन मंजिल कुछ और

हेमंत पिछले करीब तीन वर्षों से इंटेल में सेमीकंडक्टर चिप डिजाइनिंग के क्षेत्र में डिजाइन इंजीनियर के रूप में कार्यरत थे। अच्छी नौकरी, बेहतर करियर और तकनीकी क्षेत्र में मजबूत भविष्य के बावजूद उनके मन में देश के लिए कुछ अलग करने की इच्छा थी। इसी सोच ने उन्हें इसरो की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया। नौकरी के साथ तैयारी आसान नहीं थी। सात-आठ घंटे की शिफ्ट के बाद पढ़ाई के लिए समय निकालना चुनौती थी, लेकिन हेमंत ने परिस्थितियों को बहाना नहीं बनने दिया। नियमित तैयारी, अनुशासन और लक्ष्य पर फोकस के साथ उन्होंने इसरो की चयन प्रक्रिया में हिस्सा लिया और अखिल भारतीय स्तर पर सातवीं रैंक हासिल कर ली।

आईआईटी दिल्ली से पढ़ाई, चिप डिजाइनिंग से अंतरिक्ष तक

हेमंत ने आइआइटी दिल्ली से बीटेक किया। इसके बाद सेमीकंडक्टर में एमटेक की डिग्री हासिल की। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने चिप डिजाइनिंग के क्षेत्र में करियर बनाया। इंटेल में तीन वर्षों के अनुभव ने उनकी तकनीकी क्षमता को और मजबूत किया। अब यही तकनीकी दक्षता देश के अंतरिक्ष अनुसंधान में काम आएगी।

युवाओं को संदेश: लक्ष्य तय करें, शॉर्टकट नहीं

हेमंत का कहना है कि सफलता के लिए सबसे पहले लक्ष्य तय करना जरूरी है। लक्ष्य स्पष्ट हो तो परिस्थितियां बाधा नहीं बनती। नौकरी के साथ तैयारी चुनौतीपूर्ण जरूर थी, लेकिन निरंतर मेहनत और धैर्य से रास्ता बनाया जा सकता है। वे युवाओं को शॉर्टकट से बचने और सही दिशा में लगातार मेहनत करने का संदेश देते हैं। अपनी उपलब्धि का श्रेय हेमंत ने पीडब्ल्यूडी में एसीई पिता शीशपाल भुकर व गृहिणी मां सुशीला को दिया है। पूरे गांव में भी खुशी का माहौल है।

Updated on:
19 Aug 2026 03:48 pm
Published on:
19 Aug 2026 03:48 pm