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सीकर में नहीं बनेगा New Bypass, जानें सरकार ने बाईपास को नॉन फिजिबल श्रेणी में क्यों डाला?

Sikar Bypass Project: रामू का बास से कुड़ली तक बनने वाले बाईपास को सरकार ने नॉन फिजिबल की श्रेणी में डाल दिया। ऐसे में अब यह बाईपास नहीं बन सकेगा।

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Apr 29, 2026
सीकर शहर से नए बाईपास की सौगात छीनी। पत्रिका फाइल फोटो

सीकर। जिले से संभाग, नीमकाथाना जिले के बाद अब सीकर शहर के नए बाईपास की सौगात भी छीन ली गई है। रामू का बास से कुड़ली तक बनने वाले बाईपास को सरकार ने नॉन फिजिबल की श्रेणी में डाल दिया। ऐसे में अब यह बाईपास नहीं बन सकेगा। इससे रिंग रोड प्रोजेक्ट भी अटकने की आशंका है।

खास बात यह है कि सरकार ने अभी तक यह भी तर्क सार्वजनिक नहीं किए है कि किस वजह से इस बाईपास को नॉन फिजिबल माना गया है। जबकि दूसरी तरफ भढ़ाडर तिराहे से नवलगढ़ रोड के बाईपास के लिए जमीन अधिग्रहण का काम जारी है। एकतरफा बाईपास ही बनने से शिक्षानगरी के लोगों में जाम की समस्या से निजात की आस भी पूरी तरह टूट चुकी है।

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200 करोड़ की घोषणा, चाहिए थे 500 करोड़

पत्रिका ने रामू का बास से कुड़ली तक बनने वाले नए बाईपास को नॉन फिजिबल घोषित करने के मामले की पड़ताल की तो कई तथ्य सामने आए। दरअसल, सरकार ने बजट में इस बाईपास के लिए 200 करोड़ का प्रावधान तय किया था। जबकि 500 करोड़ रुपए चाहिए थे। बाईपास के लिए होने वाली जमीन अधिग्रहण के लिए किसानों को जमीन के बदले जमीन दी जानी थी। सरकार किसानों को जमीन के बदले जमीन देने के लिए नजदीक में कोई जमीन तय नहीं कर सकी। ऐसे में जमीन अधिग्रहण के मुआवजे का भार भी सरकार पर आना तय था।

एक्स पर बोले डोटासरा भाजपा ने किया धोखा

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने एक्स पर लिखा कि बाईपास का हक छीनकर भाजपा सरकार ने सीकर की जनता के साथ धोखा किया है। पहले सरकार ने सीकर संभाग और नीमकाथाना जिला खत्म किया। इसके बाद सीकर को नगर निगम की सौगात से वंचित रखा। मास्टर प्लान के नाम पर दो साल तक सीकर को गुमराह किया। यहां की जनता विकास की हकदार नहीं है क्या…। इस भेदभाव की राजनीति को यहां की जनता कभी बर्दाश्त नहीं करेगी।

जाम से राहत कैसे मिलेगी?

बाईपास को नॉन फिजिबल घोषित होने के बाद शिक्षानगरी के लोगों में आक्रोश दिखा। लोगों ने बाईपास इलाके में जाम की समस्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सरकार की ओर से शहरवासियों को जाम की समस्या से राहत दिलाने का कोई ऑप्शन नहीं बताया गया।

बाईपास नहीं मिलने से इसलिए नाराजगी

थमेगी विकास की रफ्तारः शहर में नए बाईपास बनने से विकास को भी रफ्तार मिलती। विकास योजनाओं से जुड़े एक्सपर्ट का कहना है कि रिंग रोड नहीं बनने से शिक्षानगरी में विकास की रफ्तार भी धीमी होना तय है।

बढ़ेगी जाम की समस्याः नए बाईपास व रिंग रोड अटकने की वजह से बाईपास के साथ शहर में जाम की समस्या बढ़ना तय है। यदिशिक्षानगरी में नए बाईपास के जरिए रिंग रोड बनती तो शहरवासियों को जाम की समस्या से स्थायी सहत मिलती।

अटकेगा शिक्षानगरी का विस्तारः नए बाईपास बनने से शिक्षानगरी के दायरे का भी विस्तार होता। इससे शहर के विकास की राह खुलती। नए बाईपास का प्रस्ताव अटकने से शिक्षानगरी का विस्तार भी अटकेगा। इससे सीकर के बाशिंदों के लिए रोजगार के अवसरों में भी कमी आने की आशंका है।

पत्रिका ने बुलंद की थी आवाज

शिक्षानगरी के विकास व लोगों की जरूरतों को देखते हुए राजस्थान पत्रिका ने आवाज बुलंद की थी। इसको लेकर समय समय पर समाचार प्रकाशित कर इसकी आवश्यकता बताई थी। पत्रिका में लगातार समाचारों के प्रकाशन के बाद जनप्रतिनिधियों ने सरकार को इससे अवगत करवाया था। इसके बाद सरकार ने बाईपास की घोषणा की।

सीकर की जनता से भेदभाव बर्दाश्त नहीं

लोकसभा व विधानसभा चुनाव में शेखावाटी में कमजोर प्रदर्शन रहने के बाद से ही भाजपा की सरकार की ओर से जानबूझकर शेखावाटी की जनता की अनदेखी की जा रही है। सीकर की जनता से भेदभाव किसी भी सूरत में अब बर्दाश्त नहीं होगा। यहां की जनता आगामी समय में केंद्र व राज्य सरकार से बदला लेने का काम करेगी।
-अमराराम, सांसद सीकर

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