सीकर मेडिकल कॉलेज में अब बच्चों में जन्म से बहरेपन की समस्या का निशुल्क इलाज किया जाएगा। इसके लिए ईएनटी विभाग में अलग से मॉड्यूलर ऑपरेशन थियेटर बनाया जाएगा। इससे बच्चों को आधुनिक सुविधाओं के साथ उपचार मिलेगा।
Sikar Medical College: सीकर मेडिकल कॉलेज से संबंद्ध कल्याण अस्पताल में अब अत्याधुनिक कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी की शुरुआत होने जा रही है। इसके लिए नए अस्पताल में ईएनटी (कान-नाक-गला) का अलग मॉड्यूलर ऑपरेशन थियेटर बनाया जाएगा।
इस सुविधा के शुरू होने से जन्म से बहरेपन से जूझ रहे बच्चों का निशुल्क इलाज संभव हो सकेगा और मरीजों को इलाज के लिए मेट्रो सिटी की ओर भागदौड़ से निजात मिलेगी। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, नई व्यवस्था से जिले के आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को भी बड़ा लाभ मिलेगा। चिकित्सकों के अनुसार, जन्म से कम सुनाई देने की बीमारी का समय पर सर्जरी होने से बच्चों के बोलने-सुनने और सीखने की क्षमता में सुधार आएगा।
फिलहाल, अस्पताल में कॉक्लियर इम्पलांट की सुविधा केवल पूर्व में खुले मेडिकल कॉलेज से जुड़े प्रमुख अस्पताल में मिल रही है। जहां इम्लांट के लिए मरीजों को कई महीनों तक इंतजार करना पड़ता है। जिला मुख्यालय पर सर्जरी की जरूरत वाले मरीजों को दूसरे निजी या बड़े अस्पतालों में भेजा जाता है। गौरतलब है कि जिला अस्पताल की ईएनटी की ओपीडी रोजाना औसतन दो सौ मरीज तक होती है।
कॉक्लियर इम्प्लांट एक इलेक्ट्रॉनिक मेडिकल डिवाइस है, जो गंभीर या जन्मजात बहरेपन में कान के अंदरूनी हिस्से (कॉक्लिया) को सीधे विद्युत संकेत भेजकर सुनने में मदद करता है। यह सामान्य हियरिंग एड से अलग होता है और तब उपयोगी है, जब हियरिंग एड से लाभ न मिले।
राष्ट्रीय बाल सुधार कार्यक्रम के अलावा ओपीडी में चयनित पात्र बच्चों का कॉक्लियर इम्प्लांट निशुल्क होगा। चिकित्सकों के अनुसार, 3 से 5 वर्ष की उम्र में सर्जरी होने पर बच्चों में बेहतर स्पीच डेवलपमेंट की संभावना बढ़ जाती है। समय पर सर्जरी और थैरेपी से सुनने-बोलने की क्षमता में 50 से 70 प्रतिशत तक सुधार रहता है। वहीं, ईएनटी का अलग से मॉड्यूलर ओटी होने से मरीजों की सर्जरी, थैरेपी और फॉलोअप समय पर हो सकेगा। निशुल्क सर्जरी होने के कारण बच्चों का पूरा विकास और अभिभावकों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ में कमी आएगी।
कल्याण अस्पताल में बन रहे नए अस्पताल में ईएनटी विभाग के लिए अलग से मॉड्यूलर ओटी बनाया जाएगा, जिससे मरीजों को सुनने-बोलने की नई जिंदगी मिल सकेगी।
-डॉ. हरि सिंह, वरिष्ठ चिकित्सक ईएनटी, मेडिकल कॉलेज सीकर