
RIICO Sikar Road: सीकर शहर के औद्योगिक क्षेत्र को बीकानेर बायपास से सीधे जोड़ने वाली सड़क परियोजना में 8 साल से बाधा बनी वन विभाग की 1.35 हेक्टेयर भूमि के डायवर्जन के लिए केंद्रीय पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने स्टेज-1 की सैद्धांतिक स्वीकृति जारी कर दी है।
यूआइटी द्वारा वन विभाग को एक निश्चित राशि जमा करवाने व कुछ शर्तें पूरी करने के साथ ही इस जमीन पर 450 मीटर लंबी व 30 मीटर चौड़ी सड़क की राह खुल जाएगी। इसके साथ ही सीकर रीको से बीकानेर बायपास तक की कुल दूरी महज 1230 मीटर ही रह जाएगी।
मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय के एआइजीएफ बालाजी करी की ओर से जारी स्वीकृति में कुछ शर्तें लगाई गई है। इनमें वन भूमि की कानूनी स्थिति यथावत रखना, क्षतिपूर्ति के रूप में वन विभाग के नाम गैर-वन भूमि हस्तांतरित करना, सड़क के दोनों ओर पौधारोपण करना व वन्यजीवों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े प्रावधानों की पालना सुनिश्चित करना शामिल है। इनमें से वन विभाग को बदले में नीमकाथाना में जमीन पहले ही दी जा चुकी है। अब तय राशि व बाकी शर्तें पूरी करने की रिपोर्ट के साथ ही मंत्रालय से सड़क निर्माण की स्वीकृति भी मिल जाएगी।
मास्टर प्लान 2031 के तहत रीको से बीकानेर बायपास तक की सड़क का शिलान्यास 2018 में तत्कालीन सांसद सुमेधानंद सरस्वती ने किया था। 1230 मीटर लंबी व 30 मीटर चौड़ी सड़क का बाकी काम तो हो गया, लेकिन बीच में वन विभाग की 1.35 हेक्टेयर भूमि की वजह से 450 मीटर सड़क का काम अटक गया। तब से ये फाइल यूआइटी से जिला वन विभाग और वहां से राज्य और केंद्र सरकार की टेबलों पर रैंग-रैंग कर चल रही थी।
शहर को जाम से बड़ी राहत दिलाने वाली इस सड़क परियोजना को लेकर राजस्थान पत्रिका ने बड़ा समाचार अभियान चलाया। मामले से संबंधित हर गतिविधियों का पीछा करते हुए पत्रिका ने परियोजना के पक्ष में लगातार खबरें प्रकाशित की। जिसके बाद सांसद अमराराम, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुभाष महरिया, विधायक राजेंद्र पारीक, भाजपा किसान मोर्चा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष हरिराम रणवां ने मुद्दे को विभिन्न बैठकों सहित वन व प्रभारी मंत्री संजय शर्मा के सामने भी उठाया। डीएफओ दीपक कुमार ने भी तत्परता दिखाई। इसका ही नतीजा मंत्रालय की स्वीकृति के रूप में आया है।