
Sikar Human Angle Story : मासूमियत... मां अब कभी नहीं लौटेगी: मां की राह तकती रही मासूम...कभी गोद तलाशती, कभी खेल-खेल में जमी पर लौट जाती। फोटो पत्रिका
Sikar Human Angle Story : सीकर के एसके अस्पताल के मुर्दाघर के बाहर शुक्रवार दोपहर ढाई साल की अनिष्का कभी फर्श पर लेटकर खेलती, तो कभी उठकर इठलाने लगती। उसे यह भी पता नहीं था कि जिस मां की गोद में वह रोज सुकून पाती थी, उसका शव उसी दरवाजे के भीतर पिछले तीन दिन से रखा है। बाहर परिजन न्याय और आर्थिक सहायता की मांग को लेकर धरने पर बैठे थे, जबकि मासूम अपनी दुनिया में मां के लौटने का इंतजार करती रही।
यह दृश्य वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर गया। मुर्दाघर के बाहर धरने पर बैठे परिजनों के बीच अनिष्का सबका ध्यान अपनी ओर खींच रही थी। घरवाले उसे बहलाने के लिए अस्पताल साथ ले आए थे, लेकिन वह बार-बार दरवाजे की ओर देखती और फिर खेल में खो जाती। उसे यह एहसास नहीं था कि जिस मां का वह इंतजार कर रही है, वह अब कभी लौटकर नहीं आएगी। उसकी मासूम मुस्कान और बेखबरी ने वहां मौजूद हर व्यक्ति को अंदर तक झकझोर दिया।
परिजन और प्रशासन के बीच वार्ता के बाद देर शाम धरना समाप्त हो गया। मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराकर शव मोर्चरी में रखवाया गया। शनिवार सुबह रायपुरा गांव में अंतिम संस्कार होगा। समझौते में मृतका के पति को संविदा पर नौकरी, मामले की निष्पक्ष जांच आदि मांगों पर सहमति बनी।
परिजनों के अनुसार 21 जुलाई को राजकीय जनाना अस्पताल में दीपा का सिजेरियन प्रसव हुआ था। अगले दिन इंजेक्शन लगाए जाने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई। आरोप है कि नर्सिंग स्टाफ को सूचना देने के बावजूद समय पर डॉक्टर ने नहीं देखा। हालत गंभीर होने पर देर रात जयपुर रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में उसकी मौत हो गई। इसके बाद परिजन शव वापस लेकर अस्पताल पहुंचे और न्याय तथा आर्थिक सहायता की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए।
दीपा के पति लालचंद बेटी को देखते ही भावुक हो जाते हैं। वे रंग-रोगन का काम कर परिवार चलाते हैं। उन्होंने बताया कि अब नवजात बच्ची और ढाई साल की अनिष्का के साथ मानसिक रूप से अस्वस्थ पिता की जिम्मेदारी भी उनके कंधों पर आ गई है। उन्होंने कहा, 'यदि बच्चों की देखभाल के लिए घर पर रहूं तो मजदूरी नहीं कर पाऊंगा, और मजदूरी पर जाऊं तो बच्चों को कौन संभालेगा।'
Updated on:
25 Jul 2026 08:37 am
Published on:
25 Jul 2026 08:37 am
