
सीकर। राजस्थान के सीकर जिले में होने वाले नगर निकाय चुनावों में कई अजीबोगरीब मामले भी देखने को मिल रहे हैं। चुनावों में सियासी किस्से भी कम नहीं हैं। कहीं भाई ही भाई के सामने ताल ठोक रहा है, कहीं पिता ने बेटे को चुनावी मैदान में उतारकर खुद मतदाता सूची से ही विदाई ले ली। किसी ने पार्टी बदली तो कहीं प्रत्याशियों से ज्यादा चुनावी प्रभारियों की फौज तैयार कर दी गई।
धोद के वार्ड 5 में चुनावी मुकाबला दिलचस्प हो गया है। यहां सात प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किया है। इनमें दो सगे भाई भी आमने-सामने हैं। गुमानाराम को माकपा ने टिकट दिया है, जबकि उनके भाई अशोक ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल किया है। यानी इस वार्ड में चुनावी मुकाबले की शुरुआत घर की चौखट से ही हो गई।
सीकर जिले में धोद के वार्ड 18 में भाजपा नेता एवं पूर्व उप जिला प्रमुख शोभसिंह ने अपनी राजनीतिक राह थोड़ी अलग कर ली है। उन्होंने मतदाता सूची से अपना नाम हटवा लिया, जबकि उनके बेटे धर्मेंद्र सिंह भाजपा के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं। चर्चा है कि पंचायत चुनावों को देखते हुए शोभसिंह ने नगरपालिका चुनाव से दूरी बनाई है। यानी पिता ने मैदान छोड़ा, बेटे को आगे किया।
फतेहपुर में कांग्रेस की सूची ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी। भाजपा से पार्षद रहे अरविंद योगी अब कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे। यानी वार्ड वही, चुनाव वही…बस पार्टी का झंडा बदल गया।
फतेहपुर नगर परिषद के 55 वार्डों में भाजपा ने 34 प्रत्याशी उतारे हैं, लेकिन वार्ड प्रभारी पूरे 55 के लगाए हैं। यानी जहां प्रत्याशी नहीं पहुंचे, वहां प्रभारी जरूर पहुंचेंगे। कांग्रेस ने 55 में से 43 वार्डों में प्रत्याशी उतारे हैं। भाजपा ने 2021 में 27 वार्डों में चुनाव लड़ा था।
रींगस के वार्ड 35 में चुनाव लडऩे का सपना नामांकन जांच के दौरान ही अटक गया। अभ्यर्थी ओमप्रकाश का नामांकन रिटर्निंग अधिकारी बृजेश कुमार ने खारिज कर दिया। जांच में उनके खिलाफ रींगस थाने में आपराधिक प्रकरण दर्ज होना सामने आया। यानी चुनावी दौड़ शुरू होने से पहले ही नामांकन ने ब्रेक लगा दिया।
सीकर जिले की 14 नगर निकायों में अब भी 40 से ज्यादा बागी मैदान में डटे हुए है। वहीं कई बागी मानने को राजी भी हो गए है। दूसरी तरफ कई बागियों के पार्टी से नामांकन करने और सिम्बल नहीं मिलने की वजह से नामांकन रद्द हो गया है। रोचक यह है कि कई वार्ड में पति व पत्नी दोनों ने आवेदन कर दिए, अब संशय बना हुआ है कौन मैदान छोड़े और और मैदान में उतरे। अब सभी की निगाहें नाम वापसी के बाद मैदान में डटे रहने वाले उम्मीदवारों पर टिकी है।
भाजपा व कांग्रेस ने बढ़ती बगावत को रोकने के लिए दो टूक पार्टी पदाधिकारियों को संदेश दिया है। इसमें कहा कि जिसने जिस वार्ड में टिकट दिलाया वहां पार्टी को जिताने से लेकर बगावत रोकने की जिम्मेदारी भी उन्हीं की है।