
लक्ष्मणगढ़। बोर्ड परीक्षाओं में कम नंबर आने या फेल होने पर आत्महत्या जैसे कदम उठाने वाले युवाओं के लिए लक्ष्मणगढ़ क्षेत्र के 56 वर्षीय त्रिलोकाराम एक प्रेरणा के रूप में उभर कर सामने आए हैं। भूमां छोटा गांव निवासी और पेशे से मजदूर त्रिलोकाराम ने 35 साल संघर्ष करने के बाद 12वें प्रयास में 12वीं बोर्ड परीक्षा पास कर ली। गुरुवार को घोषित 12वीं बोर्ड परीक्षा के परिणाम में त्रिलोकाराम पास हुए।
दिलचस्प बात यह है कि उनके इस संघर्ष के साक्षी उनके बेटे-बेटी भी रहे, जिन्हें त्रिलोकाराम ने ही मजदूरी करके उच्च शिक्षा दिलाई। त्रिलोकाराम आलडिया ने 1987 में 10वीं बोर्ड की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। इसके बाद 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर पाए। दो साल बाद त्रिलोकाराम ने पुन: 12वीं की परीक्षा पास करने का मन बनाया और 1991 से 1997 तक लगातार सात बार स्वयंपाठी विद्यार्थी के रूप में परीक्षा दी लेकिन असफल रहे।
इसके बाद पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते त्रिलोकाराम को पढ़ाई से दूर होना पड़ा। हालांकि इस दौरान वे अपने बच्चों को शिक्षा जरूर दिलाते रहे। उनकी एक बेटी ने एलएलबी तथा दो अन्य बेटियों व एक बेटे ने ग्रेजुएशन के बाद बीएड की पढ़ाई पूरी कर ली। वर्ष 2015, 2016 व 2021 में त्रिलोकाराम ने फिर 12वीं की परीक्षा दी, लेकिन हर बार की तरह असफल रहे। 2022-23 वर्ष में फिर परीक्षा में प्रविष्ट हुए और इस बार कामयाब भी हो गए।
उम्र बाधा नहीं, जज्बा होना जरूरी है
पत्रिका से बातचीत में त्रिलोकाराम ने कहा कि यह परीक्षा पास कर वे केवल यह दर्शाना चाहते थे कि पढ़ाई के लिए उम्र कभी आड़े नहीं आती तथा जज्बा हो तो लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।