सीकर

दुनिया के सबसे बड़े खाटूश्यामजी लक्खी मेले का आगाज़, जाने से पहले ज़रूर पढ़ लें ये ख़ास और ज़रूरी बातें

राजस्थान के सीकर जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध खाटूश्यामजी का वार्षिक फाल्गुनी लक्खी मेला आज, भक्ति और उत्साह के साथ शुरू हो गया है। देश-दुनिया से आने वाले लाखों 'श्याम प्रेमियों' के स्वागत के लिए खाटू नगरी सज-धज कर तैयार है।

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Feb 21, 2026

राजस्थान के सीकर जिले में स्थित बाबा श्याम का विश्व प्रसिद्ध फाल्गुनी लक्खी मेला आज से शुरू हो गया है। यह मेला 28 फरवरी 2026 तक कुल 8 दिनों तक चलेगा। प्रशासन और श्री श्याम मंदिर कमेटी ने इस बार करीब 35 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई है, जिसके लिए सुरक्षा और सुगम दर्शन के व्यापक इंतजाम किए गए हैं।

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मंदिर की भव्य सजावट: 120 बंगाली कारीगरों का कमाल

इस बार बाबा श्याम के दरबार को अलौकिक रूप दिया गया है।

  • विशेष श्रृंगार: करीब 120 बंगाली कारीगरों ने दिन-रात मेहनत कर मंदिर परिसर को भव्य फूलों और रोशनी से सजाया है।
  • सिंहद्वार: मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार (सिंहद्वार) पर भगवान श्री कृष्ण की मनमोहक प्रतिमा के साथ अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं, जो आकर्षण का मुख्य केंद्र हैं।

दर्शन की नई व्यवस्था: 14 लाइनों में होंगे दीदार

भीड़ को नियंत्रित करने और कम समय में दर्शन सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने नया प्लान लागू किया है:

  • जिग-जैग कतारें: श्रद्धालु अब चारण मेला मैदान, लखदातार मैदान और 40 फीट के नवीन रास्ते से होते हुए 14 अलग-अलग लाइनों में लगकर बाबा के दर्शन करेंगे।
  • VIP दर्शन पर पूर्ण रोक: मेले के दौरान किसी भी प्रकार के VIP दर्शन की अनुमति नहीं होगी, ताकि आम श्रद्धालुओं को परेशानी न हो।

पैदल यात्रियों के लिए 'विशेष कॉरिडोर'

रींगस से खाटूधाम तक की 17-18 किमी की यात्रा करने वाले पदयात्रियों के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।

  • सुरक्षित मार्ग: रींगस से खाटू तक 17 किलोमीटर लंबा विशेष पैदल कॉरिडोर बनाया गया है ताकि वाहनों और पदयात्रियों के बीच टकराव न हो।
  • चलना होगा अधिक: पदयात्रियों को विभिन्न मैदानों से होते हुए लगभग 30 किमी की कुल दूरी तय करनी पड़ सकती है।

प्रशासन की सख्त गाइडलाइंस: इनका रखें ध्यान

मेले के दौरान शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन ने कुछ कड़े निर्देश जारी किए हैं:

  • DJ और इत्र पर रोक: मेले में डीजे बजाने पर पूरी तरह रोक रहेगी। साथ ही, इत्र की शीशी और कांटेदार गुलाब के फूल ले जाने की अनुमति नहीं होगी।
  • निशान का आकार: पदयात्रियों द्वारा लाए जाने वाले 'निशान' या ध्वज का आकार 8 फीट से बड़ा नहीं होना चाहिए।
  • नो-व्हीकल जोन: खाटू कस्बे को पूरी तरह नो-व्हीकल जोन घोषित किया गया है। किसी भी निजी वाहन को कस्बे के अंदर आने की अनुमति नहीं होगी।
  • ई-रिक्शा सेवा: श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 2000 ई-रिक्शा संचालित किए जा रहे हैं, जिनका किराया ₹25 निर्धारित किया गया है।

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

मेले की सुरक्षा व्यवस्था की कमान 5 हजार से अधिक पुलिस अधिकारियों और जवानों के हाथों में है। पूरे मेला क्षेत्र और पार्किंग स्थलों की निगरानी सीसीटीवी कैमरों और क्यूआर कोड (QR Code) आधारित पार्किंग मैनेजमेंट से की जा रही है।

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Updated on:
21 Feb 2026 10:41 am
Published on:
21 Feb 2026 09:52 am
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