17 जुलाई 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Success Story: कबाड़ी का काम करने वाले सीकर के सुनील ने पास की NEET, 6 महीने के बेटे को खोया, फिर भी नहीं टूटा हौसला

NEET Result: सीकर जिले में रींगस के वार्ड नंबर-12 निवासी सुनील लोहार ने नीट परीक्षा में ओबीसी वर्ग में 5,680वीं रैंक के साथ सफलता की नई इबारत लिख दी। सुनील कभी घर-घर कबाड़ खरीदने का परंपरागत काम करने को मजबूर था। सुनील की पत्नी इंद्रा देवी ने बताया, सात महीने पहले बीमारी के कारण उनका छह महीने का बेटा दुनिया छोड़ गया था। उस कठिन समय में पूरा परिवार चाहता था कि सुनील घर पर रहें, लेकिन सभी ने उनकी पढ़ाई को प्राथमिकता दी।
2 min read
Google source verification

सीकर

image

Arvind Rao

Jul 17, 2026

Sunil Lohar NEET Success Story

Sunil Lohar NEET Success Story (Patrika Photo)

Sunil Lohar NEET Success Story: सीकर: कुछ कर गुजरने की कशिश हो तो कठिनाइयां भी कामयाबी को नहीं रोक सकतीं। रींगस के वार्ड नंबर-12 निवासी सुनील लोहार ने यही साबित कर दिखाया है। गाड़िया लोहार समाज से संबंध रखने वाला सुनील कभी घर-घर कबाड़ खरीदने का परंपरागत काम करने को मजबूर था। लेकिन इरादों से मजबूत इस नौजवान ने अब नीट परीक्षा में ओबीसी वर्ग में 5,680वीं रैंक के साथ सफलता की नई इबारत लिख दी है।

बड़ी बात यह भी है कि सुनील ने यह उपलब्धि तब हासिल की है, जब सात महीने पहले उसे अपने बेटे की मौत का गहरा सदमा भी लगा। पर अपने हौसले से हालातों को पीछे छोड़कर उसने जीवन की दिशा तय कर समाज के पहले चिकित्सक बनने के बड़े पड़ाव को पार कर लिया।

भावुक हुए पिता, बोले- बेटे ने दिखाया साहस

सुनील के पिता भगवान सहाय लोहार ने भावुक होकर कहा कि उनके समाज में बच्चों को कम उम्र से ही लोहे का काम करने में लगा दिया जाता है। पढ़ाई को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता, लेकिन सुनील ने इस सोच को बदलने का साहस दिखाया है। उन्हें विश्वास है कि जब उनका बेटा डॉक्टर बनेगा तो समाज में शिक्षा के प्रति नई जागरूकता आएगी और रूढ़िवादी सोच टूटेगी। माता सिकरी देवी ने भी इसे परिवार के साथ पूरे समाज के लिए मिसाल बताया।

सिर्फ लक्ष्य पर रखा ध्यान

सुनील ने बताया कि उन्होंने तैयारी के दौरान मोबाइल फोन से दूरी बनाई और हर पल अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित किया। खाली समय में वे पिता के साथ काम में हाथ भी बंटाते रहे। उन्होंने बताया कि एक समय वे घर-घर जाकर कबाड़ खरीदने का काम करते थे। बेटे की बीमारी और उसके निधन ने उनके भीतर डॉक्टर बनने का संकल्प और मजबूत कर दिया, ताकि भविष्य में वे जरूरतमंद लोगों की बेहतर सेवा कर सकें।

छह महीने का बेटा खोया

सुनील की पत्नी इंद्रा देवी ने बताया कि करीब सात माह पहले बीमारी के कारण उनका छह माह का बेटा दुनिया छोड़ गया था। उस कठिन समय में पूरा परिवार चाहता था कि सुनील घर पर रहे, लेकिन सभी ने उसकी पढ़ाई को प्राथमिकता दी। सुनील केवल एक दिन के लिए रींगस आए और फिर अपनी तैयारी में जुट गए। उन्होंने कहा कि बेटे को खोने का दर्द आज भी है, लेकिन नीट में सफलता की खबर ने उस पीड़ा के बीच नई उम्मीद और खुशी दी है।