सिरोही

Farmers News: राजस्थान के इस जिले में अरण्डी की बम्पर पैदावार, लेकिन मालामाल हो रहा है गुजरात, जानिए कैसे

Castor Crop: खनिज संपदा के साथ-साथ कृषि क्षेत्र में भी सिरोही जिले की अलग पहचान है, जहां अरण्डी की खेती तेजी से विस्तार ले रही है। बंपर उत्पादन के बावजूद स्थानीय मंडी और प्रोसेसिंग यूनिट नहीं होने से किसानों को अपनी उपज गुजरात ले जाकर बेचनी पड़ रही है।

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Feb 03, 2026
अरण्डी की फसल व मौजूद किसान। फोटो- पत्रिका

सिरोही। खनिज संपदा से भरपूर सिरोही जिला कृषि प्रधान भी है। यहां पैदा होने वाली सौंफ की खुशबू देश-दुनिया में पहचान बना चुकी है, वहीं अरण्डी भी जिले की प्रमुख फसलों में शुमार है। जिले की जलवायु और भूमि अरण्डी की खेती के लिए बेहद उपयुक्त है, इसी कारण यहां इसकी बंपर पैदावार होती है। हर साल जिले में करीब 45 से 50 हजार हैक्टेयर में अरण्डी की बुवाई होती है और बुवाई का रकबा लगातार बढ़ रहा है।

सिरोही जिले में अरण्डी की अच्छी पैदावार होती है, लेकिन विडंबना यह है कि स्थानीय स्तर पर इस फसल की बिक्री की कोई सुविधा नहीं है और न ही कोई प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित है। किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए गुजरात जाना पड़ता है।

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ऐसे में जिले में उत्पादित अरण्डी से गुजरात को तो लाभ मिल रहा है, जबकि किसानों को दोहरा नुकसान उठाना पड़ रहा है। यदि जिले में कृषि मंडी खुले और प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित हों, तो किसानों की आय बढ़ सकती है और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे, जिससे जिले का कृषि क्षेत्र विकास की नई ऊंचाइयों को छू सकेगा।

जिले में 50 हजार हैक्टेयर में लहलहा रही फसल

वर्तमान में सिरोही जिले में करीब 50 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में अरण्डी की फसल लहलहा रही है। यह नकदी फसल कम लागत में अधिक मुनाफा देती है और दवाइयों से लेकर औद्योगिक उपयोग तक इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। इसी कारण किसान भी इस फसल की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं और हर साल इसका रकबा बढ़ता जा रहा है।

अरंडी के तेल की बाजार में अच्छी मांग है, इसलिए अन्य तिलहनी फसलों की तुलना में इसका बेहतर भाव मिलता है। सामान्य तौर पर अरण्डी की बुवाई खरीफ फसलों के साथ जुलाई या अगस्त माह में की जाती है। इस साल जिले में 50 हजार 192 हैक्टेयर में अरण्डी की बुवाई की गई है।

कृषि मण्डी खुले तो नहीं हो दोहरा नुकसान

जिले में अरण्डी की भरपूर पैदावार होने के बावजूद कृषि मंडी नहीं होने से किसानों को फसल बेचने गुजरात जाना पड़ता है। स्थानीय स्तर पर बिक्री की सुविधा मिलने पर किसानों की आय में इजाफा हो सकता है। फिलहाल गुजरात आने-जाने में परिवहन पर अतिरिक्त खर्च होता है और वहां भी कई बार फसल का पूरा मूल्य नहीं मिल पाता, जिससे किसानों को दोहरा नुकसान झेलना पड़ता है।

यदि मंडार और रेवदर में स्वीकृत कृषि मंडियां शुरू हो जाएं, तो किसानों को बड़ा लाभ मिल सकता है। किसानों का कहना है कि जिला स्तर पर कृषि मंडी नहीं होने के कारण उन्हें मजबूरी में अपनी उपज गुजरात की ऊंझा मंडी में बेचनी पड़ती है। जिले में पूर्ण सुविधायुक्त कृषि मंडी स्थापित होने से किसानों को राहत मिलेगी, बेहतर दाम मिलेंगे और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

इनका कहना है

सिरोही जिले की जलवायु और भूमि अरण्डी की खेती के लिए बेहद उपयुक्त है। इस वर्ष 50 हजार 192 हैक्टेयर में अरण्डी की बुवाई हुई है। यह नकदी फसल कम खर्च में अधिक मुनाफा देती है और दवाइयों से लेकर औद्योगिक उपयोग तक इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। लेकिन सिरोही में प्रोसेसिंग यूनिट और बिक्री की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण किसान अपनी उपज गुजरात की ऊंझा मंडी में बेचने को मजबूर हैं।

  • शंकरलाल मीणा, संयुक्त निदेशक, कृषि विभाग सिरोही

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