
सिरोही। सरकार की बिना ब्याज अल्पकालीन फसली ऋण योजना और कम किराए पर ट्रैक्टर सुविधा किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है। ऋण राशि मिलने से किसान लाभकारी फसलों की बुवाई पर विशेष ध्यान दे रहे हैं, जिससे उनकी आय में बढ़ोतरी हो रही है और वे बचत भी कर पा रहे हैं। निर्धारित समयावधि में ऋण चुकाने पर किसानों को ब्याज नहीं देना पड़ रहा है। वहीं कम किराए पर ट्रैक्टर उपलब्ध होने से खेत की जुताई और तैयारी का कार्य आसान हो गया है। इससे किसानों को साहूकारों पर निर्भर नहीं रहना पड़ रहा। सिरोही जिले में ग्राम सेवा सहकारी समितियों से जुड़े 34 हजार 115 काश्तकार विभिन्न योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं, जिनमें आबूरोड ब्लॉक के करीब 4 हजार किसान शामिल हैं।
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किसानों को बुवाई, खाद-बीज व खेती संबंधी अन्य कार्यों के लिए बिना ब्याज के अधिकतम 1.50 लाख रुपए का अल्पकालीन ऋण रबी और खरीफ की फसलों के लिए दिया जाता है। यह राशि उन्हें निर्धारित समय में चुकानी होती है। ऋण राशि बकाया नहीं होने पर किसान लगातार इस योजना का फायदा उठा सकता है। इसके लिए समिति से जुड़े किसान को ऑनलाइन आवेदन करना पड़ता है। सिरोही सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक से सत्यापन के बाद ऋण राशि किसान के खाते में जमा होती है।
सहकारी समितियों के माध्यम से गोपालन योजना में पशुओं के शेड निर्माण समेत अन्य सुविधाओं के लिए किसानों को बिना ब्याज के एक लाख रुपए तक का ऋण दिया जाता है। यह ऋण एक वर्ष में चुकाना होता है। योजना से किसान अपने पशुओं की बेहतर देखभाल कर पा रहे हैं। उन्हें खेती के साथ दुधारू पशुओं से अतिरिक्त आय भी प्राप्त हो रही है।
सांतपुर समिति के व्यवस्थापक अफजल के अनुसार वर्ष 2022-23 में लागू इस योजना के तहत सरकार ने सहकारी समितियों को ट्रैक्टर उपलब्ध करवाए हैं। समिति से जुड़े किसानों को खेत की खड़ाई के लिए ट्रैक्टर की आवश्यकता होने पर कम शुल्क पर यह सुविधा दी जाती है। सिरोही के आबूरोड ब्लॉक में आकराभट्टा, मूंगथला, देलदर और किवरली में समिति स्तर पर यह सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है।
इस वर्ष जिले में बिना ब्याज अल्पकालीन फसली ऋण वितरण का लक्ष्य 292 करोड़ रुपए रखा गया है। इसमें खरीफ की फसल के लिए 157 करोड़ और रबी की फसल के लिए 135 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए हैं। खरीफ की फसल के लिए ऋण वितरण जुलाई तक चलेगा। अभी तक 14 हजार 760 किसानों को करीब 82 करोड़ रुपए का ऋण दिया जा चुका है। पिछले वर्ष 281 करोड़ रुपए का लक्ष्य रखा गया था, जिसे 99 प्रतिशत पूरा किया गया।
गोपालन योजना में बिना ब्याज के एक लाख रुपए का ऋण लिया था। गायों के लिए शेड निर्माण में बड़ी मदद मिली। समय पर ऋण चुका दिया है।
अल्पकालीन ऋण से करीब 15 वर्ष से खेती कर रहा हूं। समय पर ऋण चुका देता हूं। योजना से बड़ी राहत मिल रही है।
ऋण राशि का उपयोग उन फसलों के लिए करता हूं, जिनमें फायदा ज्यादा मिलता है। आय हो रही है और बचत भी कर पा रहा हूं। समिति को ऋण समय पर चुका देता हूं, इसलिए वर्ष में दो बार ऋण मिल जाता है।
अल्पकालीन फसली ऋण लेने के प्रति किसानों में जागरूकता आई है। उन्हें इसका बड़ा लाभ मिल रहा है। इस वर्ष रबी और खरीफ की फसलों के लिए 292 करोड़ रुपए ऋण वितरण का लक्ष्य रखा गया है।
शिविरों में किसानों को कृषि योजनाओं की जानकारी दी जाती है। वे इनका फायदा लेने आगे आ रहे हैं। कम शुल्क पर खड़ाई के लिए ट्रैक्टर सुविधा भी उपलब्ध करवाई जा रही है।