Sirohi Monkey Baby : सिरोही शहर में पिछले चार दिनों से एक बंदर का बच्चा गंभीर परेशानी में है। बताया जा रहा है कि पानी पीने के दौरान उसने स्टील के लोटे में मुंह डाल दिया, जो गर्दन तक फंस गया। इसके बाद से वह लोटा निकाल नहीं पा रहा है और लगातार अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है।
सिरोही। शहर में इन दिनों एक भावुक कर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने स्थानीय लोगों को चिंतित कर दिया है। एक छोटे बंदर के बच्चे की गर्दन में स्टील का लोटा फंस गया है, जिसके कारण वह पिछले चार दिनों से न तो खाना खा पा रहा है और न ही पानी पी पा रहा है। इस वजह से वह लगातार अपनी मां के साथ सड़कों और गलियों में भटकता नजर आ रहा है।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बंदर का बच्चा अपनी मां से चिपका रहता है और काफी कमजोर दिखाई दे रहा है। मां भी अपने बच्चे की परेशानी को समझते हुए उसे हर समय अपने साथ रखती है और आसपास मंडराती रहती है। दोनों को कई इलाकों में घूमते देखा गया है। यह दृश्य देखने के बाद स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है और कई लोग उसकी मदद के लिए आगे भी आए हैं।
आशंका जताई जा रही है कि बंदर का बच्चा पानी पीने के लिए लोटा में मुंह डाला और वह फंस गया। बच्चे की गर्दन में फंसे लोटे की वजह से वह कुछ भी खा-पी नहीं पा रहा है। भूख और प्यास से उसकी हालत लगातार खराब होती जा रही है। इस घटना की जानकारी मिलने के बाद समाजसेवी तृप्ति जैन ने तुरंत प्रशासन को सूचित किया और एडीएम डॉ. राजेश गोयल से इस मामले में मदद की गुहार लगाई।
इस बीच पीएफए (पीपल फॉर एनिमल्स) की टीम के मनोज भाई जैन, संदीप छीपा और कुछ स्थानीय लोग बंदर के बच्चे की मदद के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं, ताकि सुरक्षित तरीके से उसके मुंह में फंसा लोटा निकाला जा सके। हालांकि लोगों का कहना है कि जिम्मेदार विभागों की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आई है।
पीएफए से जुड़े लोगों ने अतिरिक्त जिला कलेक्टर और नगर परिषद आयुक्त को भी इस बारे में जानकारी देकर बंदर को ट्रेंकुलाइज कर लोटा निकालने की मांग की है। वहीं कुछ जागरूक नागरिकों ने मंत्री ओटाराम देवासी और पूर्व विधायक लोढ़ा को भी इस घटना से अवगत कराया है। फिलहाल वन विभाग और माउंट आबू की टीम बंदर को ढूंढने में जुटी हुई है, लेकिन वह अभी नजर नहीं आ रहा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत कदम उठाते हुए माउंट आबू से रेस्क्यू टीम को बुलाया है। टीम के पहुंचने के बाद बंदर के बच्चे को सुरक्षित तरीके से पकड़कर उसकी गर्दन में फंसे स्टील के लोटे को निकालने की कोशिश की जाएगी। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि बंदरों की जिज्ञासु प्रवृत्ति के कारण कई बार वे ऐसी चीजों से खेलने लगते हैं, जो बाद में उनके लिए मुसीबत बन जाती हैं।