
रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल। फोटो- पत्रिका
जयपुर। जल जीवन मिशन से जुड़े हजारों करोड़ रुपए के कथित घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने रिटायर्ड आईएएस अधिकारी डॉ. सुबोध अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया है। उन्हें गुरुवार को नई दिल्ली से हिरासत में लेने के बाद जयपुर लाया गया, जहां औपचारिक गिरफ्तारी की गई। फिलहाल एसीबी उनसे गहन पूछताछ कर रही है और शुक्रवार को उन्हें अदालत में पेश कर रिमांड पर लेने की तैयारी है।
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एसीबी के महानिदेशक गोविंद गुप्ता ने प्रेस वार्ता में बताया कि यह कार्रवाई टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी और पद के दुरुपयोग से जुड़े मामले में की गई है। आरोप है कि फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर टेंडर जारी किए गए और शर्तों में हेरफेर कर 50 करोड़ रुपए तक के प्रोजेक्ट्स मंजूर किए गए। इस प्रकरण में पहले ही 10 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि तीन अन्य आरोपी अब भी फरार हैं। उनके खिलाफ स्टैंडिंग वारंट जारी कर संपत्ति जब्त करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
इस पूरे मामले में एसीबी की विशेष जांच टीम ने करीब 65 दिनों तक तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्यों की जांच की। इसके बाद जयपुर, उदयपुर, बाड़मेर और दिल्ली सहित कई स्थानों पर एक साथ छापेमारी की गई। जांच में सामने आया कि मैसर्स श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी और मैसर्स श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी ने फर्जी कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र के आधार पर टेंडर हासिल किए। इसके अलावा 50 करोड़ रुपए से अधिक के प्रोजेक्ट्स में टेंडर पूलिंग और नियमों के विपरीत बोलीदाताओं की जानकारी साझा करने के आरोप भी सामने आए हैं।
डॉ. सुबोध अग्रवाल 1988 बैच के आईएएस अधिकारी रहे हैं और राज्य के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों में गिने जाते रहे हैं। वे जलदाय, खनन, ऊर्जा और चिकित्सा जैसे अहम विभागों में अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद पर कार्य कर चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग में सचिव रहते हुए उनकी अन्नपूर्णा भंडार योजना को नीति आयोग से भी सराहना मिल चुकी है। इस मामले में केवल अग्रवाल ही नहीं, बल्कि करीब 170 अधिकारी और कर्मचारी भी जांच के दायरे में हैं। उनके परिवार के सदस्य भी उच्च पदों पर कार्यरत हैं, जिनमें उनकी पत्नी आयकर विभाग में मुख्य आयुक्त और पुत्र भारतीय राजस्व सेवा में अधिकारी हैं।
Updated on:
09 Apr 2026 07:52 pm
Published on:
09 Apr 2026 07:17 pm
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