सिरोही

राजस्थान में 11 बहनों का इकलौता भाई सांसारिक सुख त्याग कर बना संन्यासी, सिरोड़ी गांव से अब तक 52 लोगों ने अपनाया संयम पथ

Sanyasi Harshit Sanghvi: सिरोही के सिरोड़ी गांव में 11 बहनों के इकलौते भाई हर्षित संघवी ने सांसारिक जीवन त्यागकर आचार्य रविरत्नसूरी महाराज की निश्रा में संयम ग्रहण किया। दीक्षा के बाद उनका नाम मुनिराज हितगुण रत्न विजय रखा गया। सिरोड़ी से अब तक 52 लोग संयम अपना चुके हैं, जबकि संघवी परिवार के यह सातवें सदस्य बने हैं।
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Jun 27, 2026
Sanyasi Harshit Sanghvi
हर्षित संघवी सांसारिक सुख त्याग कर बने संन्यासी (पत्रिका फोटो)

Sirohi Sanyasi Harshit Sanghvi: सिरोही: राजस्थान के सिरोही जिले के सिरोड़ी गांव में शनिवार को एक ऐतिहासिक और भावुक कर देने वाला दीक्षा महोत्सव संपन्न हुआ। रेखा बेन एवं जितेंद्र कुमार संघवी के पुत्र, मुमुक्षु 30 वर्षीय हर्षित जितेन्द्र संघवी ने समस्त सांसारिक वैभव और सुखों का त्याग कर संयम पथ ग्रहण कर लिया है। 11 बहनों के बीच इकलौते भाई हर्षित के दीक्षा लेने का यह क्षण वहां मौजूद हजारों श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत भावुक और गौरवपूर्ण रहा।

आचार्य भगवंत श्रीमद्विजय रविरत्नसूरीश्वरजी महाराज की पावन निश्रा में वैदिक मंत्रोच्चार और संपूर्ण धार्मिक विधि-विधान के साथ यह दीक्षा महोत्सव आयोजित किया गया। हर्षित संघवी अब जैन शासन के नए रत्न बनकर मुनिराज जिनवर रत्न विजय महाराज के शिष्य बन गए हैं। दीक्षा के बाद पूज्य आचार्य श्री ने उनके नए नाम 'मुनिराज हितगुण रत्न विजय' की घोषणा की, जिससे पूरा पंडाल करतल ध्वनि और जयकारों से गूंज उठा।

रजोहरण पाकर झूम उठे श्रद्धालु

दीक्षा की मुख्य क्रियाओं के अंतर्गत आचार्य श्री ने नूतन मुनिराज को संयम जीवन का प्रतीक 'रजोहरण' (ओगा) प्रदान किया और केशलोचन की विधि संपन्न कराई। सांसारिक वस्त्रों का त्याग कर जब नूतन मुनिराज श्वेत साधु वेश में क्रिया मंडप पहुंचे, तो भावविभोर श्रद्धालुओं ने अक्षत (चावल) की वर्षा कर उनका भव्य अभिनंदन किया।

सिरोड़ी के 52वें संयमी

इस अवसर पर उपस्थित आचार्य लब्धिवल्लभसूरी महाराज ने नूतन मुनिराज को आशीर्वाद दिया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि अकेले सिरोड़ी गांव से अब तक 52 लोगों का संयम जीवन अंगीकार करना पूरे जैन समाज के लिए बहुत बड़े गौरव की बात है।

हाथी-घोड़ों के साथ निकला भव्य वरघोड़ा

दीक्षा महोत्सव से पूर्व मुमुक्षु हर्षित का हाथी, घोड़े और बैंड-बाजों के साथ नगर में एक बेहद भव्य वरघोड़ा (दीक्षा जुलूस) निकाला गया। दीक्षा के दिन माता-पिता और परिजनों ने अश्रुपूर्ण आंखों और गर्व भरे दिल से हर्षित को विजय तिलक लगाया और संयम जीवन के लिए विदा किया। इस महामहोत्सव में बड़ी संख्या में साधु-साध्वी भगवंत, देश भर से आए श्रद्धालु और स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे।

महोत्सव के समापन के बाद, आचार्य रविरत्नसूरी महाराज अपने शिष्य मंडल के साथ अहमदाबाद के लिए विहार कर गए, जहां इस वर्ष उनका चातुर्मास न्यू वासणा क्षेत्र में होने जा रहा है। आयोजनकर्ता शांतिलाल पूनमचंद संघवी परिवार ने इस प्रसंग को सफल बनाने के लिए श्रीसंघ एवं समस्त ग्रामवासियों का आभार व्यक्त किया।

Updated on:
27 Jun 2026 09:08 pm
Published on:
27 Jun 2026 08:28 pm