सीतापुर

Sitapur: इश्क की जुदाई या कानून का डर, जेल गेट पर युवक ने बहा दिया अपना ही खून

Sitapur News: सीतापुर में जिला कारागार गेट पर एक आरोपी युवक ने पुलिस कस्टडी में ब्लेड से अपना गला काटकर आत्मघाती प्रयास किया। नाबालिग किशोरी को भगाने के मामले में गिरफ्तार 29 वर्षीय युवक को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस सुरक्षा चूक की जांच कर रही है।

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Feb 20, 2026
नाबालिग से प्रेम प्रसंग के मामले में गिरफ्तार युवक ने पुलिस कस्टडी में उठाया आत्मघाती कदम (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

Sitapur Shock: सीतापुर जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां पुलिस कस्टडी में ले जाए जा रहे एक आरोपी युवक ने जिला कारागार के गेट पर ब्लेड से अपनी ही गर्दन काटकर आत्मघाती प्रयास किया। घटना रामपुर कलां थाना क्षेत्र से जुड़ी है। गंभीर रूप से घायल युवक को आनन-फानन में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज जारी है। चिकित्सकों के अनुसार उसकी हालत फिलहाल स्थिर है, लेकिन वह निगरानी में है।

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आरोपी की पहचान 

पुलिस के मुताबिक घायल युवक की पहचान 29 वर्षीय आशीष (निवासी बाबूवापुर) के रूप में हुई है। आशीष पहले से शादीशुदा बताया जा रहा है। आरोप है कि उसका एक 17 वर्षीय नाबालिग किशोरी से प्रेम प्रसंग चल रहा था। इसी क्रम में जनवरी 2026 में वह किशोरी को अपने साथ लेकर चला गया था।

परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने नाबालिग को भगाने का मुकदमा दर्ज किया था। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने दोनों को बरामद कर लिया था। किशोरी को परिजनों को सौंपते हुए विधिक प्रक्रिया पूरी की गई, जबकि आशीष के खिलाफ संबंधित धाराओं में कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।

एक माह तक फरार रहा आरोपी

पुलिस सूत्रों के अनुसार घटना के बाद आरोपी करीब एक माह तक फरार रहा। लगातार तलाश के बाद उसे गिरफ्तार किया गया। रामपुर कलां पुलिस ने आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर उसे जेल भेजने की तैयारी की। बताया जा रहा है कि गुरुवार शाम पुलिस टीम आरोपी को लेकर जिला कारागार सीतापुर पहुंची थी। इसी दौरान कारागार के मुख्य गेट के पास अचानक अप्रत्याशित घटना घट गई।

जेल गेट पर आत्मघाती प्रयास

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक जैसे ही पुलिस आरोपी को जेल में दाखिल कराने की प्रक्रिया में जुटी, उसने अचानक अपने पास छिपाकर रखा ब्लेड निकाला और अपनी गर्दन पर वार कर लिया। घटना इतनी अचानक हुई कि पुलिसकर्मी कुछ समझ पाते, उससे पहले ही वह लहूलुहान हो चुका था। घटना से वहां मौजूद पुलिसकर्मियों और जेल स्टाफ में हड़कंप मच गया। तत्काल उसे सरकारी वाहन से जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसे भर्ती कर लिया।

जिला अस्पताल में भर्ती 

जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने बताया कि युवक की गर्दन पर गहरा जख्म है, लेकिन समय पर इलाज मिलने से उसकी जान बच गई। फिलहाल उसकी हालत स्थिर है और उसे निगरानी में रखा गया है। डॉक्टरों का कहना है कि कुछ समय तक उसे अस्पताल में ही रखा जाएगा ताकि संक्रमण या अन्य जटिलताओं से बचाव किया जा सके।

सुरक्षा में चूक पर सवाल

घटना के बाद पुलिस विभाग में हलचल मच गई है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आरोपी के पास ब्लेड कैसे पहुंचा? पुलिस कस्टडी में होने के बावजूद उसने अपने पास धारदार वस्तु कैसे छिपा ली। वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। प्रारंभिक जांच में यह देखा जा रहा है कि तलाशी प्रक्रिया में कहीं कोई चूक तो नहीं हुई। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित कर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

प्रेम प्रसंग और मानसिक दबाव

स्थानीय सूत्रों के अनुसार आरोपी प्रेमिका से जुदाई और कानूनी कार्रवाई को लेकर मानसिक तनाव में था। हालांकि पुलिस ने इस पर आधिकारिक टिप्पणी करने से परहेज किया है। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसे मामलों में आरोपी अक्सर सामाजिक दबाव, कानूनी परिणाम और पारिवारिक तनाव के कारण आवेश में आ जाते हैं। इसलिए कस्टडी में ले जाए जा रहे आरोपियों की काउंसलिंग और सख्त निगरानी जरूरी है।

नाबालिग से जुड़े मामले में आगे की कार्रवाई

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि नाबालिग किशोरी से जुड़े मामले में विधिक प्रक्रिया जारी रहेगी। संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज है और अदालत में आरोपपत्र दाखिल करने की तैयारी की जा रही है। किशोरी को परिजनों की सुपुर्दगी में दिया गया है और उसका बयान दर्ज किया गया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस सतर्कता बरत रही है।

जेल प्रशासन की प्रतिक्रिया

जिला कारागार प्रशासन ने भी घटना की जानकारी उच्चाधिकारियों को दे दी है। जेल अधीक्षक ने बताया कि आरोपी को जेल में दाखिल करने से पहले की प्रक्रिया के दौरान यह घटना हुई। उन्होंने कहा कि सुरक्षा मानकों की समीक्षा की जा रही है और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए अतिरिक्त सावधानी बरती जाएगी।

कानून-व्यवस्था पर असर

पुलिस कस्टडी में इस तरह की घटना कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह लगाती है। हालांकि समय रहते इलाज मिलने से बड़ा हादसा टल गया, लेकिन इस घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर चर्चा शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि कस्टडी में ले जाए जा रहे आरोपियों की सघन तलाशी और निगरानी आवश्यक है, ताकि वे स्वयं को या दूसरों को नुकसान न पहुंचा सकें।

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