गंगापुरसिटी . राजनीति की राह कतई आसान नहीं होती। हर रोज नई चुनौतियां होती हैं। जनता ने निर्दलीय के रूप में मुझ पर भरोसा जताया है, जिसे मैं हमेशा कायम रखूंगा। कांग्रेस से टिकट कटने का अफसोस है, लेकिन जनता के काम मेरी प्राथमिकताओं में शुमार हैं, जिन्हें मैं निर्दलीय के रूप में रहकर भी पूरा करूंगा। क्षेत्र के तमाम मुद्दों पर विधायक मीना से पत्रिका ने की खास बातचीत।
सवाल : विधायक का विजन क्या है?
जवाब : मेरा विजन क्षेत्र की जनता को मूलभूत सुविधाएं देना है। खास तौर से सभी के लिए सडक़, बिजली एवं पानी मिले। बाहर से यहां आकर बसने वाले लोगों को सभी सुविधाएं मिले और गंगापुर औद्योगिक नगरी के रूप में विकसित हो।
सवाल : क्षेत्र के लिए क्या वादा करके जीते? और उसके लिए क्या प्रयास कर रहे हैं?
जवाब : मैंने विकास का वादा किया है। पहले भी संसदीय सचिव रहकर विकास की गंगा बहाई और अब भी नया गंगापुर बनाने का प्रयास होगा। हर वर्ग का विकास कराना मेरी प्राथमिकताओं मेें शुमार है। इसके लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं।
सवाल : पहली 5 प्रथमिकताएं क्या हैं?
जवाब : 1 . लोगों को लंबित पड़ी चम्बल योजना को दु्रत गति से शुरू कराकर पानी देना। 2. शहर में उच्च शिक्षा के लिए इंस्टीट्यूट खुलवाना। 3. क्षेत्र में मेडिकल सुविधा बढ़ाई जाएंगी। अस्पताल को क्रमोन्नत कराकर बेहतर बड़ा और अस्पताल बनाएंगे। 4. गांव-ढाणी तक जाने के लिए साधनों का अभाव है। मेरा प्रयास इनमें इजाफा करने का होगा। 5. क्षेत्र में बड़ी इंडस्ट्री की दरकार है। सेंड स्टोन का यहां बड़ा काम हो सकता है। इसके लिए हम प्रयास कर रहे हैं।
सवाल : कैसे संपर्क में रहेंगे लोगों से?
जवाब : मैं पहले विधायक रहते हुए भी लोगों के सीधे संपर्क में रहा। शहर के बीचोंबीच मेरा मकान है। लोग कभी भी यहां आकर अपनी बात कह सकते हैं। मेरे दरवाजे जनता के लिए चौबीस घंटे खुले हैं। मैं भी समय-समय पर क्षेत्र में जाकर लोगों से मिलता हूं।
सवाल : क्या नौकरी की तलाश में भटके?
जवाब : पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी की तलाश की और राजस्थान प्रशासनिक सेवा में 1983 में प्रतियोगी परीक्षा से चयन हुआ। अधिनस्थ सेवाओं के तहत कॉपरेटिव में वर्ष 1985 में ज्वाइन किया। मैंने यहां 15 साल नौकरी की और वर्ष 2000 में स्वैच्छिक सेवानिवृत लेकर राजनीति में प्रवेश किया।
सवाल : राजनीति में संघर्ष की कहानी
जवाब : राजनीति एक तरह से संघर्ष ही है। जनता के हितों के लिए संघर्ष करना पड़ता है। छात्र जीवन से ही राजनीति में दिलचस्पी रही। सरकारी सेवा के दौरान कर्मचारी नेता के रूप में इसे और बढ़ावा मिला। परिवार हमेशा से स्थानीय राजनीति से जुड़ा रहा, लेकिन पहली विफलता और संघर्ष के बाद मैं विधानसभा तक पहुंचा। शुरुआत में वर्ष 2003 में बसपा का दामन थाममकर चुनाव लड़ा, लेकिन सफलता नहीं मिली। फिर वर्ष 2008 में बसपा से ही गंगापुर की जनता का आशीर्वाद मिला। इस कार्यकाल में ऐतिहासिक काम यहां किए।
सवाल : क्या टिकट नहीं मिलने की टीस रही?
जवाब : मैं शुरू से ही कांग्रेस विचारधारा से प्रभावित रहा। लगातार टिकट की मांग की, लेकिन टिकट नहीं मिला। वर्ष 2008 से 2018 तक 10 साल कांग्रेस की सेवा कर जिले में वर्चस्व काम किया। इस चुनाव में कांग्रेस ने धोखा कर निष्क्रिय व्यक्ति को टिकट दिया, जिसे जनता ने नकारा दिया। टिकट नहीं मिलने का बेहद अफसास है और आक्रोश भी। प्रदेश स्तर के नेताओं ने हाईकमान को गलत फीड किया। कमेटी के लोगों को भी गलत फीडिंग दी। निष्ठावान कार्यकता को नकारा गया। लगातार 10 साल सेवा करने के बाद टिकट से वंचित रखना पार्टी को किसी भी रूप में शोभा नहीं देता। व्यक्तिगत रंजिश रखते हुए मनमुटाव एवं व्यक्तिगत झगड़े को पार्टी के झगड़े में बदलकर टिकट काटना अच्छी बात नहीं। इसकी मैंने राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी से शिकायत की है। अब उनसे मिलकर सारी स्थिति से मिलकर अवगत कराऊंगा कि निष्ठावान कार्यकर्ता का अपमान नहीं होना चाहिए।
सवाल : निर्दलीय जीते हैं क्या मंत्री बनने की ख्वाहिश है?
जवाब : जनता ने निर्दलीय के रूप में विश्वास जताया है। निर्दलीय रहकर इस सरकार को गंगापुर की जायज मांगों को मानने के लिए बाध्य करूंगा। हर स्तर पर गंगापुर के साथ जो भेदभाव हो रहा है उसे दूर करने की कोशिश करूंगा। मंत्री बनने की कोई अभिलाषा नहीं है। यह मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है कि वह मंत्रीमंडल में किसे लेते हैं। अब निर्दलीय के रूप में ही अपनी भूमिका निभाएंगे और जनता की आवाज बनकर काम करूंगा।
सवाल : पहले कितने वादे पूरे किए और अब क्या बदलाव चाहते हैं?
जवाब : वर्ष 2008 में चुनाव लडऩे के दौरान विशेष वादे नहीं किए। इसके बाद भी गंगापुर में ऐतिहासिक काम किए। खास तौर से गंगापुर को मेगा हाइवे से जोड़ा, 220 केवी ग्रिड स्टेशन दौलतपुर बनवाया, बिजली के क्षेत्र में जिलास्तर की सुविधाएं, अस्पताल और कॉलेज को क्रमोन्नत कराया। नगरपालिका को नगरपरिषद बनवाकर संस्थागत विकास कराए।
सवाल : विधानसभा के लिए क्या सपना है?
जवाब : मैंने पिछले कार्यकाल में गंगापुर को जिला बनाने का सपना देखा था, जो अधूरा रहा। जिस समय करौली जिला बना उस समय गंगापुर जिले की पात्रता रखता था। राजनीतिक दवाब के चलते गंगापुर के साथ अन्याय हुआ और करौली जिला बन गया। अब यहां के लोग अपने काम के लिए 70 किमी के लिए दूर जाते हैं। गंगापुर जिले की सारी पात्रता रखता है। नादौती, सपोटरा एवं मलारना डूंगर का कुछ हिस्सा जोडकऱ गंगापुर को जिला बनाया जा सकता है। पिछले कार्यकाल में भरसक कोशिश की थी और 80 प्रतिशत काम हो गया था। उस समय जिला कलक्टर ने सकारात्मक भूमिका निभाते हुए अच्छी रिपोर्ट भेजी थी, लेकिन कमेटी में मामला अटक गया था। अब इसके लिए फिर से प्रयास करूंगा।
दोनों दलों को दी मात
विधायक रामकेश मीना वर्ष 2008 में बसपा की टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे और कांग्रेस में शामिल होकर संसदीय सचिव बने। वर्ष 2013 में इन्हें हार का सामना करना पड़ा। वर्ष 2018 में पार्टी ने टिकट काट दिया। ऐसे में मीना निर्दलीय के रूप में लड़े। उनके सामने भाजपा के मान सिंह गुर्जर एवं कांग्रेस के राजेश अग्रवाल मैदान में आए। मीना ने दोनों दलों को मात देकर जीत दर्ज की।
सवाल : किस तरह होती है दिन की शुरुआत? कैसे चलता है दफ्तार?
जवाब : दिन की शुरुआत भगवान की पूजा-आराधना से होती है। पूजा-अर्चना के बाद अखबार पढकऱ निवास पर आने वाले लोगों से मुलाकात करता हूं। क्षेत्र से आने वाले सभी लोगों की समस्या सुनता हूं। कोशिश रहती है कि लोगों की समस्या का हल जल्द हो। इसके लिए अधिकारियों को फोन करता हूं।
सवाल : स्कूल-कॉलेज कहां से किया?
जवाब : स्कूल की शिक्षा गंगापुरसिटी हायर सैकंडरी से की। इसके बाद स्नातक स्तर की पढ़ाई सवाईमाधोपुर से की। राजस्थान यूनिवर्सिटी से वर्ष 1982 में इतिहास विषय में स्नातकोत्तर की शिक्षा ग्रहण की।