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मिलिए देश की मिसाइल वुमन टेसी थॉमस से, जिन पर सबको है गर्व

मिसाइल वुमन के नाम से मशहूर टेसी 1988 में डीआरडीओ से जुड़ीं।
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Updated: 30 Nov 2017, 12:09 PM IST
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महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने हाल ही में एक ट्वीट लिखा- टेसी बॉलीवुड की किसी भी अदाकारा से ज्यादा प्रसिद्ध होने की योग्यता रखती हैं। उनके पोस्टर हर भारतीय स्कूल में होने चाहिए, जो रूढिय़ों को खत्म करेगा और लड़कियों को आगे बढऩे की प्रेरणा देगा। इसके जवाब में एक यूजर ने लिखा- आप अपनी किसी कार का नाम इनके नाम पर क्यों नहीं रखते। आनंद को सुझाव पसंद आया, उन्होंने अपनी कंपनी के वीसी को ट्वीट किया, शानदार आइडिया। विजय तुम सुन रहे हो ना? टेसी एडिशन कैसा रहेगा?

पुरुषों का वर्चस्व तोड़ा
मिसाइल वुमन के नाम से मशहूर टेसी 1988 में डीआरडीओ से जुड़ीं। उस समय महिला वैज्ञानिक तो देश में बहुत थीं, लेकिन मिसाइल वैज्ञानिकों में पुरुषों का ही वर्चस्व कायम था। ऐसे में टेसी का मिसाइल वैज्ञानिक बनना वाकई गर्व की बात थी। टेसी ने बताया था कि महिला होने की वजह से उन्हें अपने कार्यस्थल पर कभी किसी तरह के भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा।

मिसाइल कार्यक्रम में योगदान
इस समय टेसी डीआरडीओ में अडवांस्ड सिस्टम्स लैब की डायरेक्टर हैं। उन्होंने भारतीय मिसाइल कार्यकम में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। पृथ्वी, आकाश, अग्नि, नाग, धनुष, त्रिशूल और ब्रह्मोस जैसी मिसाइलों के अनुसन्धान और विकास पर काम किया है। उन्होंने अग्नि मिसाइल के लगभग सभी संस्करणों को जन्म दिया है, इसीलिए उन्हें देश की अग्निपुत्री कहा जाता है।

आईएएस की परीक्षा भी पास की
टेसी के पति सरोज कुमार भारतीय नौसेना में कमांडर हैं। दोनों का एक बेटा है, जिसका नाम तेजस हैं। उन्हें सिल्क साड़ी पहनना पसंद है। एक आम भारतीय महिला की तरह बिंदी लगाना और मंगलसूत्र पहनना भी उन्हें पसंद है। टेसी ने डीआरडीओ के साथ प्रशासनिक परीक्षा भी दी थी। दोनों ही परीक्षाओं में वे पास हो गईं, लेकिन डीआरडीओ का इंटरव्यू भी उसी दिन था, जिस दिन आईएएस का। टेसी ने दोनों के बीच डीआरडीओ को चुना।

स्कूल में आया रॉकेट बनाने का ख्याल
टेसी का जन्म केरल के आलप्पुषा में हुआ था। उनके पिता बिजनेसमैन थे। मां गृहणी थीं। टेसी के अभिभावकों ने उनका नाम मदर टेरेसा के नाम से प्रभावित होकर रखा था। टेसी जब स्कूल में थीं, तभी नासा का अपोलो यान चांद पर उतरने वाला था, इस खबर को पढऩे के बाद ही उन्हें रॉकेट बनाने का ख्याल आया।

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