
घटना स्थल पर मौजूद लोग। पत्रिका फाइल फोटो
झुंझुनूं। छापोली और मंडावरा के आठ परिवारों के लिए सोमवार का दिन ऐसी त्रासदी लेकर आया, जिसका दर्द शायद जिंदगीभर कम नहीं होगा। कहीं मां की गोद सूनी हो गई तो कहीं बूढ़े माता-पिता का सहारा छिन गया। किसी मासूम के सिर से पिता का साया उठ गया तो किसी बहन ने अपना भाई खो दिया। निर्माणाधीन सड़क पर करंट ने आठ मजदूरों की जिंदगी छीन ली। बुधवार को हादसे के तीसरे दिन भी दोनों गांवों में मातम पसरा हुआ है। घरों में अपनों को खोने का गम था और गांव की गलियों में पसरी खामोशी हादसे की भयावहता बयां कर रही है। आठों मृतकों का अंतिम संस्कार कर दिया गया, लेकिन पीछे छूट गए परिवारों का दुख हर किसी को भावुक कर रहा था। हालात ऐसे रहे कि दोनों गांवों में एक दिन तो चूल्हे तक नहीं जले।
हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने के लिए डिस्कॉम ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। मृतकों के परिवारों और घायलों को मुआवजा दिलाने के साथ ही हादसे की जांच के लिए कमेटी गठित की गई है। डिस्कॉम के एसई रवींद्र खींचड़ ने बताया कि मृतकों के परिवारों को निर्धारित मुआवजा देने के लिए कमेटी का गठन कर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विभाग का प्रयास है कि एक सप्ताह के भीतर प्रभावित परिवारों को मुआवजा दे दिया जाए। हालांकि, आर्थिक सहायता से प्रभावित परिवारों को कुछ संबल मिल सकता है, लेकिन अपनों को खोने का दर्द किसी मुआवजे से कम नहीं हो सकता।
छापोली में हुए हादसे ने सड़क निर्माण और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां धार्मिक आस्था का केंद्र कदमकुंड स्टेट हाईवे से करीब एक किलोमीटर अंदर स्थित है। श्रद्धालुओं की आवाजाही के चलते ग्रामीण लंबे समय से यहां तक सड़क बनाने की मांग कर रहे थे। ग्रामीणों के अनुसार, वन विभाग की जमीन होने के कारण सड़क निर्माण की अनुमति नहीं मिल पा रही थी। करीब पांच साल से चली आ रही मांग पूरी नहीं होने पर ग्रामीणों ने जनसहयोग से राशि जुटाकर सड़क बनाने का निर्णय किया। निर्माण कार्य आरसीसी का काम करने वाले ठेकेदार को सौंपा गया था। सवाल यह है कि यदि सड़क निर्माण के लिए जरूरी अनुमति और विभागीय समन्वय समय पर हो जाता, तो क्या निर्माण से पहले बिजली के तारों और मशीनों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर समुचित इंतजाम किए जा सकते थे? हादसे के बाद इन पहलुओं की जांच जरूरी हो गई है।
जानकारी के अनुसार सड़क निर्माण का काम कुछ दिनों से बंद था और सोमवार को दोबारा शुरू हुआ था। सड़क पर रोडी-कंकरीट मिलाने के लिए मिक्सर मशीन लाई गई थी। मशीन के पास एक दर्जन से अधिक लोग मौजूद थे। इसी दौरान ढलान के कारण मशीन खिसकने लगी। मजदूरों ने दौड़कर उसे रोकने का प्रयास किया। मशीन का संतुलन बिगड़ने से सभी का ध्यान उसे संभालने पर केंद्रित हो गया। इसी बीच मशीन का लिफ्ट वाला हिस्सा ऊपर से गुजर रही बिजली की लाइन के संपर्क में आ गया और करंट फैल गया। इस हादसे में आठ लोगों की जान चली गई और पांच घायल हो गए। एक ही घटना ने कई परिवारों की दुनिया उजाड़ दी। हादसे की परिस्थितियों को देखते हुए निर्माण स्थल पर बिजली लाइन की स्थिति, मशीन की सुरक्षित आवाजाही और कार्यस्थल पर बरती गई सावधानियों की जांच महत्वपूर्ण है।
बिजली के तारों की ऊंचाई को लेकर उठ रहे सवालों पर एसई रवींद्र खींचड़ ने कहा कि विभाग के अनुसार बिजली की लाइन के तार निर्धारित मानकों के मुताबिक ऊंचाई पर थे। सड़क निर्माण शुरू करने से पहले विभाग को इसकी सूचना नहीं दी गई थी। उनका कहना है कि यदि विभाग को सड़क निर्माण की जानकारी दी जाती तो तारों को और ऊंचाई पर करने की व्यवस्था की जा सकती थी। उन्होंने बताया कि सड़क बनने से रास्ते का स्तर बढ़ने के कारण तारों और सड़क के बीच की ऊंचाई का अंतर कम हो गया होगा। इसके बावजूद पूरे मामले की जांच कराई जा रही है। डिस्कॉम की ओर से समय-समय पर बिजली लाइनों का रखरखाव किए जाने की बात भी कही गई है। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि हादसे के लिए कौन-कौन से कारण जिम्मेदार रहे और संबंधित विभागों तथा निर्माण कार्य से जुड़े लोगों की ओर से सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम किए गए थे।
हादसे के बाद सड़क निर्माण की अनुमति, बिजली लाइन की स्थिति और निर्माण स्थल पर सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों को पांच साल तक सड़क के लिए इंतजार करना पड़ा। अनुमति नहीं मिलने पर उन्होंने जनसहयोग से निर्माण शुरू कराया। ऐसे में यह जांच जरूरी है कि निर्माण के दौरान संबंधित विभागों के बीच समन्वय क्यों नहीं हुआ और बिजली लाइन के नीचे भारी मशीन के संचालन से पहले जोखिम का आकलन किया गया था या नहीं। फिलहाल आठ परिवार अपनों को खोने के असहनीय दुख से गुजर रहे हैं। मुआवजे की प्रक्रिया और जांच अपनी जगह है, लेकिन छापोली और मंडावरा के इन घरों में जो खालीपन आया है उसे भर पाना संभव नहीं है।
Updated on:
4 Nov 2026, 2:50 PM IST
Published on:
4 Nov 2026, 2:50 PM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.