
सीएम से फोन पर बात करते मंत्री व ग्रामीणों को समझाती पुलिस। फोटो: पत्रिका
उदयपुरवाटी (झुंझुनूं)। आठ श्रमिकों की मौत ने छापोली के कदम कुंड में वर्षों से दबे ग्रामीणों के गुस्से को बाहर ला दिया। हादसे के बाद प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने कहा, हमारे गांव में न सड़क है और न ही मोबाइल नेटवर्क। आपसी सहयोग और चंदे से सड़क बनाने का काम शुरू किया तो उसे बार-बार रोका गया। हाथा-जोड़ी कर फिर से काम शुरू करवाया। चाहे कोई भी काम हो, इस गांव के लिए नहीं है कोई सरकार।
ग्रामीण ग्यारसीलाल, अमित कुमार, विष्णु कुमार, राकेश कुमार, राहुल कुमार, अजय कुमार आदि का कहना है कि वे वर्षों से सड़क, मोबाइल नेटवर्क और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं का इंतजार कर रहे हैं। कदम कुंड में शिव मंदिर, गणेश मंदिर, कुंड आदि के विकास कार्य, मरम्मत आदि भी ग्रामीणों ने अपने पैसे से करवाएं है। कदम कुंड में हर साल हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन यहां तक सड़क बनवाने के लिए ग्रामीणों को चंदा जुटाना पड़ रहा है।
ग्रामीणों की मांग मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचाने के लिए मंत्री झाबर सिंह खर्रा को भी स्टेट हाईवे तक जाना पड़ा। ग्रामीणों का आरोप है कि नेटवर्क नहीं होने से हादसे के समय बिजली निगम तक सूचना पहुंचाने में भी परेशानी हुई। उनका कहना है कि मोबाइल नेटवर्क होता तो बिजली की लाइन बंद करवाने के लिए समय पर सूचना दी जा सकती थी और शायद जनहानि कम होती।
छापोली का कदम कुंड धार्मिक आस्था के साथ प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां प्राकृतिक कुंड में कदम के पेड़ों की जड़ों से पानी आता है। परिसर में भगवान शिव और दुर्गा माता सहित कई देवी-देवताओं के मंदिर हैं। सावन के चार महीनों में यहां श्रद्धालुओं की सबसे अधिक आवाजाही रहती है। बारिश में पहाड़ियों से गिरते झरने और प्राकृतिक जलधाराएं पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। इसके बावजूद यहां सड़क, मोबाइल नेटवर्क और सुरक्षा इंतजामों का अभाव है।
कदम कुंड तक पहुंचने वाला रास्ता लंबे समय से क्षतिग्रस्त था। सरकारी सहायता का इंतजार करने के बजाय ग्रामीणों ने चंदा जुटाकर सीसी सड़क बनाने का निर्णय लिया। इसी सड़क निर्माण के दौरान हुए हादसे में आठ श्रमिकों की जान चली गई। दूसरी ओर मोबाइल नेटवर्क नहीं होने से आपात स्थिति में सूचना देना भी मुश्किल होता है। हादसे के बाद अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को भी फोन करने के लिए बाइक से हाईवे तक जाना पड़ा।
Updated on:
3 Nov 2026, 8:05 AM IST
Published on:
3 Nov 2026, 8:03 AM IST
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