नगर पालिका द्वारा सवाई माधोपुर चौराहे पर लाखों रुपए की लागत से यात्रियों के लिए सुलभ शौचालय बनवा तो दिया, लेकिन पालिका प्रशासन इसकी सुध लेना तक भूल गया। सुलभ शौचालय के आसपास अस्थाई अतिक्रमण होने से लाखों रुपए की लागत से बने सुलभ शौचालय का उपयोग नहीं हो पा रहा है।
इंद्रगढ़. नगर पालिका द्वारा सवाई माधोपुर चौराहे पर लाखों रुपए की लागत से यात्रियों के लिए सुलभ शौचालय बनवा तो दिया, लेकिन पालिका प्रशासन इसकी सुध लेना तक भूल गया। सुलभ शौचालय के आसपास अस्थाई अतिक्रमण होने से लाखों रुपए की लागत से बने सुलभ शौचालय का उपयोग नहीं हो पा रहा है।
लाखों रुपए का सफाई का टेंडर होने के बावजूद भी संवेदक द्वारा समय पर सफाई नहीं करवाई जाती, जिससे बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं बदबू और गंदगी के कारण शौचालय का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।शौचालय के आसपास हो रहे का अस्थाई अतिक्रमण हटाने की मांग भी कई बार बोर्ड मीटिंग में भी उठ चुकी है,लेकिन पालिका प्रशासन द्वारा आज तक भी अतिक्रमण नहीं हटवाया गया। अतिक्रमण हटाने को लेकर पालिका प्रशासन ने कई बार अतिक्रमियों को नोटिस भी जारी कर दिए, लेकिन पालिका के नोटिस अतिक्रमियों पर कोई असर नहीं हुआ।
मुक्तिधाम के सामने स्थित सुलभ शौचालय के आसपास हो रहे ही स्थाई अतिक्रमण हटवाने के लिए कई बार अधिशासी अधिकारी को अतिक्रमण हटाने के लिए अवगत करवा दिया। सुलभ शौचालय की सफाई करवा दी जाएगी।
बाबूलाल बैरवा, अध्यक्ष नगर पालिका इंद्रगढ़
नैनवां. नगरपालिका ने शौचालय तो बना दिए, लेकिन कभी इनकी देखरेख नहीं करने से शौचालय दरवाजे विहीन हो गए, जिससे लोग शौचालयों के लगे लोहे के दरवाजों को ही खोलकर ले गए। महिलाओं को खुले में शौच जाने से रोकने के लिए उनकी बस्तियों के पास ही सराय के पीछे शौचालयों की सुविधा के लिए 12 सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण कराया था। शौचालयों में पानी की सुविधा के लिए नल कनेक्शन करवा रखे है। तीन वर्ष से शौचालयों के दरवाजे नहीं होने से उपयोग में नहीं आ रहे है, जिससे बस्ती की महिलाओं को परकोटे की खाइयों में खुले में शौच करना पड़ रहा है।
शहर के खानपोल क्षेत्र में भी खुले में शौच जाने से रोकने के लिए परकोटे के पास ही दस सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण कराया था। इन सभी शौचालयों के लगाए लोहे के दरवाजे भी गायब है। इन शौचालयों की भी देखरेख नहीं करने से लोग दरवाजों को खोलकर ले गए। दरवाजे विहीन हो जाने से यह शौचालय भी काम में नहीं आ रहे। शौचालयों के बाहर जंगल उगा पड़ा है।