
श्रीगंगानगर। बिहार के बांका जिले में कथित अवैध रेत खनन और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने राजस्थान, बिहार, दिल्ली और हरियाणा में एक साथ बड़ी कार्रवाई की। ईडी की पटना क्षेत्रीय इकाई ने श्रीगंगानगर, जयपुर, दिल्ली, गुरुग्राम, पटना और बांका में कुल 12 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। ईडी ने बताया कि तलाशी के दौरान 2.92 करोड़ रुपए नकद, बिक्री विलेख, बैंक खातों का रिकॉर्ड, चेक, ऋण अनुबंध, निवेश संबंधी दस्तावेज तथा महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए हैं।
ईडी के अनुसार यह कार्रवाई मैसर्स महादेव एन्क्लेव प्राइवेट लिमिटेड, बांका (बिहार) से जुड़े मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई। जांच एजेंसी का दावा है कि कंपनी का नियंत्रण श्रीगंगानगर के चांडक परिवार के पास है। ईडी के मुताबिक परिवार के प्रमुख अशोक चांडक तथा उनके पुत्र राघव चांडक कंपनी के संचालन से जुड़े है। एजेंसी ने बताया कि जांच की शुरुआत बांका में दर्ज विभिन्न एफआइआर के आधार पर की गई, जिनमें कंपनी और उसके निदेशक मनोज पचीसिया पर बड़े पैमाने पर अवैध रेत खनन के आरोप लगाए गए है।
जांच के दौरान ईडी ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी), पटना से बांका जिले के नदी रेत घाटों का भू-स्थानिक (जियोस्पेशियल) विश्लेषण कराया। ईडी के अनुसार रिपोर्ट में वित्तीय वर्ष 2015-16 से 2022-23 तक करीब आठ वर्षों के दौरान बड़े पैमाने पर कथित अवैध रेत खनन का उल्लेख है। एजेंसी का दावा है कि अवैध रूप से निकाली गई रेत का अनुमानित मूल्य 131 रुपए करोड़ से अधिक है।
ईडी ने बताया कि आइआइटी की रिपोर्ट के आधार पर धन शोधन निवारण अधिनियम की धारा 66(2) के तहत जानकारी बिहार राज्य खनन निगम लिमिटेड को साझा की गई। इसके बाद बिहार सरकार के खान एवं भू-विज्ञान विभाग ने 21 अगस्त 2025 को एफआइआर संख्या 365/2025 दर्ज की, जिसकी जांच अभी जारी है। ईडी ने कहा है कि जब्त दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है तथा मामले में आगे की जांच जारी है। एजेंसी के अनुसार जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
श्रीगंगानगर में चांडक परिवार ने करीब 12 वर्ष पहले सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया। वर्ष 2014 से 2023 तक नगर परिषद की राजनीति में परिवार का प्रभाव रहा। अशोक चांडक के भाई अजय चांडक वर्ष 2014 से 2019 तक नगर परिषद सभापति रहे। इसके बाद चांडक की पत्नी करुणा चांडक वर्ष 2019 से 2023 तक सभापति रहीं।
अशोक चांडक ने वर्ष 2018 में कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन निर्दलीय प्रत्याशी राजकुमार गौड़ से हार गए। वर्ष 2023 में उनकी पत्नी करुणा चांडक निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतरीं और करीब 55 हजार मत हासिल किए, हालांकि भाजपा के जयदीप बिहाणी विजयी रहे। लोकसभा चुनाव से पहले ईडी का नोटिस मिलने के बाद अशोक चांडक ने कांग्रेस छोड़ भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली।