श्री गंगानगर

मानवता शर्मसार: पिता और दादा ने जिंदा दफनाया 7 वर्षीय बालक, सूरतगढ़ में कटी जीभ और फटे होंठ के साथ दबा मिला

Rajasthan News: सूरतगढ़ क्षेत्र में मानवता को झकझोर देने वाले मासूम बालक को जिंदा दफनाने के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। पिता और दादा को दोषी मानते हुए अपर जिला एवं सेशन न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा दी है।
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Rajasthan Police
मामला दर्ज करती पुलिस टीम की प्रतीकात्मक तस्वीर: पत्रिका

Suratgarh Child Murder Attempt: सूरतगढ़ क्षेत्र में मानवता को झकझोर देने वाले मासूम बालक की हत्या के प्रयास के बहुचर्चित मामले में अपर जिला एवं सेशन न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए पिता और दादा को आजीवन कारावास की सजा दी है। न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह अपराध केवल परिवार ही नहीं, बल्कि मानवता और सामाजिक विश्वास के खिलाफ भी है।

अपर लोक अभियोजक संजय सोढा ने बताया कि 17 मार्च 2022 को मानकसर के पास रेत के टीलों में एक 7-8 वर्षीय बालक के दबे होने की सूचना सिटी पुलिस को मिली। मौके पर पहुंची पुलिस ने देखा कि बालक गंभीर रूप से घायल अवस्था में रेत में दबा हुआ था।

उसके होंठ फटे हुए थे, जीभकटी हुई थी और चेहरा सूजा हुआ था। पुलिस ने तुरंत उसे बाहर निकालकर राजकीय चिकित्सालय में भर्ती करवाया, जहां से हालत गंभीर होने पर उसे श्रीगंगानगर और बाद में पीबीएम अस्पताल बीकानेर रेफर किया गया।

मारने की नीयत से टीलों में जिंदा दबाया

उन्होंने बताया कि बालक की पहचान नहीं होने के कारण शुरुआत में जांच में पुलिस को कठिनाई आई, लेकिन बाद में बालक की पहचान माधव चौधरी के रूप में हुई। पुलिस जांच में सामने आया कि पिता श्रवण चौधरी और दादा रामराशी चौधरी ने उस पर संदेह करते हुए उसे मारने की नीयत से टीलों में जिंदा दबा दिया।

मामले की जांच में पुलिसकर्मी रामकुमार और जांच अधिकारी मोटाराम की अहम भूमिका रही। पुलिस ने ठोस साक्ष्य जुटाकर न्यायालय में चालान पेश किया। सुनवाई के दौरान अपर लोक अभियोजक संजय सोढ़ा ने 18 गवाह और 71 दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत इस मामले में अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश मोहम्मद आसिफ अंसारी ने दोनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए धारा 307/34 आईपीसी के तहत आजीवन कारावास व 50,000 रुपए का जुर्माना, धारा 325 में 7 वर्ष का कठोर कारावास व 15,000 रुपए जुर्माना तथा धारा 323 में 1,000 रुपए का जुर्माना लगाया।

न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि पिता और दादा पर बच्चे की सुरक्षा की जिम्मेवारी होती है, लेकिन आरोपियों ने इस पवित्र दायित्व को त्यागकर अमानवीय कूरता की। यह कृत्य समाज में विश्वास को तोड़ने वाला है, इसलिए कठोर दंड आवश्यक है।

Updated on:
29 Mar 2026 08:07 am
Published on:
29 Mar 2026 08:06 am