
श्रीगंगानगर. कभी शहर में लगे हर होर्डिंग को पढ़ने की मजबूरी, तो कभी आसपास देखी तांत्रिक क्रियाओं से प्रभावित होकर वैसा ही व्यवहार करने की आदत। ये मामले मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी उन परेशानियों की ओर इशारा करते हैं, जो धीरे-धीरे लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रही हैं। आधुनिक जीवनशैली में सुविधाएं और संचार के साधन बढ़े हैं, लेकिन इसके साथ तनाव, बेचैनी और मानसिक दबाव भी बढ़ रहा है। श्रीगंगानगर के जिला अस्पताल में रोजाना 200 से अधिक लोग मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, मानसिक परेशानी के पीछे केवल एक कारण जिम्मेदार नहीं होता। आनुवंशिक कारणों के साथ बेरोजगारी, करियर और कारोबार की चिंता, पारिवारिक विवाद, एकल परिवारों में अकेलापन और मोबाइल का अत्यधिक इस्तेमाल भी मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा, दूसरों से आगे निकलने की होड़, कम समय में सब कुछ हासिल करने की चाह, वहम और अंधविश्वास भी परेशानी बढ़ा सकते हैं। लगातार तनाव में रहने वाले कुछ लोग राहत पाने के लिए नशे का सहारा लेने लगते हैं, जिससे उनकी स्थिति और गंभीर हो सकती है।
मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को नजरअंदाज करना या उन्हें केवल अंधविश्वास से जोड़कर देखना नुकसानदायक हो सकता है। समय रहते लक्षणों को पहचानना, परिवार के सदस्यों से खुलकर बातचीत करना और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ से परामर्श लेना जरूरी है। खासकर बच्चों और युवाओं के व्यवहार में अचानक बदलाव दिखाई दे, तो उसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि सही समय पर उपचार और परिवार का सहयोग मानसिक स्वास्थ्य सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
बदलती जीवनशैली में तनाव लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है। पढ़ाई और परीक्षा के दबाव से बच्चे, जबकि नशे की प्रवृत्ति और पारिवारिक समस्याओं से युवा भी मानसिक परेशानियों से जूझ रहे हैं। कई लोग विशेषज्ञ से उपचार कराने के बजाय अंधविश्वास के चक्कर में पड़ जाते हैं, जिससे समय पर मदद नहीं मिल पाती। परिवार के सदस्यों को बच्चों और युवाओं के व्यवहार में बदलाव पर ध्यान देना चाहिए और उनसे संवाद करना चाहिए। जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लें।
- डॉ. प्रेम अग्रवाल, वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल, श्रीगंगानगर